जंतर मंतर से लेकर संसद मार्ग तक मंगलवार को केंद्र सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल पर खूब गर्मा गर्मी रही। देश के अलग-अलग हिस्से से आए किसान नेता जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए वहां सरकार के खिलाफ मोर्चा निकाला। मगर यहां किसानों में एकजुटता नजर नहीं आई। एक ही भूमि अधिग्रहण के लिए तीन अलग-अलग बड़े धरने का आयोजन किया गया। दो धरना जंतर-मंतर पर था तो एक धरना संसद मार्ग पर आयोजित किया गया।
कई किसान ऐसे थे जिन्हें तीनों जगहों से न्यौता आया था। ऐसे में किसानों का कई समूह भटकता रहा कि आखिर वह किसमें शरीक हो। जंतर-मंतर पर अन्ना और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का दो अलग-अलग धरना चल रहा था।
इसके अलावा अलग-अलग किसान संगठनों का धरना संसद मार्ग पर चल रहा था जिसमें अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गज शामिल थे। यही नहीं अन्ना अपने धरने को छोड़कर उस धरने में शामिल हो गए। इसी से कंफ्यूजन बढ़ा। कई लोग धरना के समर्थन पर जंतर मंतर पहुंचे लेकिन उन्हें अन्ना वहां के बजाए संसद मार्ग पर चल रहे दूसरे धरने पर मिले।
बिजनौर से रामबहादुर ने कहा कि वह पहले अन्ना के आंदोलन में शरीक होने आए थे मगर वह नहीं मिले। वहीं मेरठ से आए नितिन त्यागी का कहना था कि मै तीनों धरने में बारी-बारी से शरीक हुआ। उनके मुताबिक मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि तीनों धरने से फायदा किसान को ही मिलेगा।