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धौलाकुआं: इनकी दरिंदगी की सजा भुगत रहा परिवार

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धौलाकुआं रेपकांड के दोषियों को अदालत ने उम्रकैद दी लेकिन उनके परिवार वाले तो सजा से भी बुरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अपने घरों के मुखिया रहे मोबाइल, छोटी बिल्ली, बड़ी बिल्ली, खुटकन और काले की कमाई से ही यह परिवार चलते थे।
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घर के मुखिया के जेल जाने से यह परिवार भुखमरी और गांव के लोगों की मेहरबानी के बीच अपनी जिंदगी काट रहे हैं। घिनौने काम की वजह से बेटों के जेल जाने का गम इन पाचों दोषियों के पिता बर्दाश्त नहीं कर सके। गिरफ्तारी के एक साल के भीतर ही पांचों के पिता एक एक कर दुनिया से रुखसत हो गए।

धौज गांव के लोगों ने बताया कि पांचों पहाड़ पर काम करते थे। काम बंद होने पर परिवार पालने के लिए इन्होंने छोटी-मोटी चोरियां शुरू कर दीं। शाहिद उर्फ बड़ी बिल्ली का विवाह हुए करीब पौने दो साल गुजरे थे, जब वह गिरफ्तार हुआ। उस समय उसकी पत्नी गर्भवती थी और एक साल का बच्चा गोद में था।
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पत्नी और बच्चों के अलावा उस पर मां और आठ भाई बहनों का पेट पालने का जिम्मा था। बूढ़े पिता सूका की बेटे के जेल जाने के चंद माह बाद ही मौत हो गई। आज पूरा परिवार गांववालों के रहमो-करम पर पल रहा है।

भाई-बहनों को पाल रही अपाहिज मां

इकबाल उर्फ छोटी बिल्ली की गिरफ्तारी के बाद छोटे भाई सुहैल (उस समय उम्र 10 वर्ष) पर परिवार के दस सदस्यों की जिम्मेदारी आ गई। प्राइवेट वाहनों में सवारी भरवाने वाले सुहैल को अब शाम तक सौ रुपये मिल जाते हैं, यह रुपये पूरे परिवार का पेट भरने के लिए नाकाफी होते हैं।

खेलने की उम्र में परिवार संभाल रहे सुहैल को शादी योग्य हो चुकीं दो बहनों की भी चिंता है। आंखों में आंसू भर सुहैल तीन साल पहले गुजरे पिता कल्लू को याद करते हुए कहता है कि अब काम धंधा करूं या घर की रखवाली, अब्बा थे तो कम से कम फिक्र तो नहीं थी।

कमरू उर्फ मोबाइल के जेल जाने के बाद पूरा परिवार बिखर गया। पिता सुलेमान बेटे की गिरफ्तारी के एक साल के भीतर चल बसे। पति के छूटने की आस खत्म होती देख पत्नी भी तीन बच्चों को लेकर मायके चली गई।

परिवार में शादी लायक एक बेटी सहित चार भाई बहनों को अब कमरू की एक पैर से अपाहिज बूढ़ी मां पाल रही है। तीन बहनों में अकेले बचे आठ साल का भाई गांव वालों का छोटा मोटा काम करने लगा है। इसमें उसे शाम तक बीस-तीस रुपये मिल जाते हैं जो परिवार के गुजारे के काम आते हैं।
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बिगड़ गया भाई का मानसिक संतुलन

उस्मान उर्फ काले के परिवार में अब सिर्फ एक पागल भाई और बूढ़ी मां बचे हैं। बेटे की गिरफ्तारी का सदमा पिता खां साहब के लिए जानलेवा साबित हुआ। दो साल पहले एक सड़क हादसे का शिकार हुए छोटे भाई इस्लाम का मानसिक संतुलन बिगड़ गया।

उस्मान की पत्नी अब मजदूरी कर बूढ़ी सास, पागल देवर और अपनी चार बेटियों की जिंदगी पाल रही है। शादी लायक हो चुकी बेटी के लिए फिक्रमंद उस्मान की पत्नी कहती है कि उनकी बेटियों ने क्या बिगाड़ा था जो उन्हें यह सजा मिल रही है?

शमशाद उर्फ खुटकन के परिवार का भी हाल इन्ही जैसा है। बेटे के जेल से छूटने की आस लिए ही पिता दुनिया से गुजर गए। छह सदस्यीय परिवार को अब खुटकन का छोटा भाई संभाल रहा है। रेपकांड में पांचों के गिरफ्तार होने के बाद इनके परिवारों पर जैसे मुसीबत आ गई थी।

कमाऊ सदस्य जेल में और बाहर गांव वालों के विरोध ने इन परिवारों को तोड़कर रख दिया था। गांव के बड़े हाजी कासिम जैसे बुजुर्गों ने लोगों को समझाया कि घटना के लिए परिवार वालों को दोषी मानना ठीक नहीं है। धीरे धीरे हालात बदले, अब इन परिवारों की मदद को गांव वाले आगे आए हैं। गांव के इस्लाम उद्दीन ‘मिलाप’ कहते हैं कि सजा तो पांच परिवारों को मिल ही रही है।
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