- रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनोवेशन समिट में विशेषज्ञों ने रखे विचार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। रेलवे में निवेश और अवसंरचना सुधार के लिए आयोजित 5वें रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनोवेशन समिट में विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने भविष्य की दिशा पर चर्चा की। इस दौरान रेलवे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पर जोर दिया गया और कहा गया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के विकास और संचालन में निजी निवेश को बढ़ावा देकर रेलवे की माल ढुलाई क्षमता को नई गति दी जा सकती है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल)के निदेशक (ऑपरेशन, प्लानिंग एंड बिजनेस डेवलपमेंट) शोभित भटनागर ने कहा कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल रेलवे ढांचे को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी पूंजी तभी आकर्षित होगी, जब नीतियां पारदर्शी, व्यावहारिक और निवेशकों के अनुकूल हों।
गति शक्ति कार्गो टर्मिनल बनेगा गेमचेंजर
भटनागर ने कहा कि गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) नीति रेलवे की लॉजिस्टिक क्षमता को कई गुना बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि आधुनिक टर्मिनलों के विकास से न केवल माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, बल्कि सड़कों पर ट्रैफिक दबाव भी घटेगा। इससे रेलवे स्मार्ट लॉजिस्टिक्स का हब बन सकता है। समिट में इस बात पर सहमति बनी कि पारंपरिक सरकारी निवेश से आगे बढ़ते हुए रेलवे को आधुनिक तकनीक और पीपीपी मॉडलों को अपनाना होगा। 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेल नेटवर्क को इंटीग्रेटेड कॉरिडोर मॉडल, हरित ऊर्जा आधारित अवसंरचना और डिजिटल नवाचार से जोड़ना जरूरी होगा।