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आतंकी की तबीयत खराब, नहीं दी जा सकती फांसी

Wed, 26 Feb 2014 04:04 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में कहा है कि 1993 बम विस्फोट के आरोपी देवेंद्र सिंह भुल्लर को फांसी पर नहीं लटकाया जा सकता है क्योंकि उसकी मानसिक हालत ठीक नहीं है।
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भुल्लर की फांसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आतंकी की पत्नी ने याचिका दी है, जिसपर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा था। इसके अलावा दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग ने भी भुल्लर को फांसी ना देने की मांग की है।

इस केस पर सुप्रीम कोर्ट 10 मार्च को सुनवाई करेगा।

केजरीवाल ने भी भुल्लर के पक्ष में लिखी थी चिटठी

मौत की सजा पाए आतंकी देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की रिहाई के हक में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी।

कुछ सप्ताह पहले अरविंद केजरीवाल की तरफ से जंतर मंतर पर सिखों से जुड़े विभिन्न मुद्दों की मांग को लेकर बैठे इकबाल सिंह को भेजे गए पत्र में साफ किया गया है कि दिल्ली सरकार ने भुल्लर की रिहाई की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी है।

पार्टी के दो विधायकों ने जंतर-मंतर जाकर एसआईटी गठन की घोषणा और भुल्लर को लेकर चिट्ठी का हवाला देकर इकबाल सिंह का अनशन खत्म कराया था। दिल्ली सरकार ने रिहाई नहीं, बल्कि फांसी की सजा को बीमारी का हवाला देकर आजीवन कारावास में बदलने की बात कही थी।
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क्या है भुल्लर का मामला?

देवेंद्र सिंह भुल्लर को 1993 में नई दिल्ली के रायसीना रोड पर यूथ कांग्रेस ऑफिस पर हुए धमाके में मौत की सजा हुई है। धमाके में 9 लोग मारे गए थे और उस समय के युवा कांग्रेस अध्यक्ष एमएस बिट्टा सहित 25 लोग घायल हुए थे।

भुल्लर का शाहदरा के मानसिक रोग अस्पताल (इहबास) में इलाज चल रहा है। इस आधार पर उसकी मौत की सजा बदलने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी, जिसे पिछले साल खारिज कर दिया गया था।
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