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तबाही वाले भूकंप से कुछ यूं सहमी देश की राजधानी दिल्ली

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भूकंप के दो झटकों से दिल्ली-एनसीआर की धरती ऐसी हिली कि लोग दहशत में आ गए। डरे सहमे लोग घरों और ऑफिसों से सुरक्षित जगह की ओर भागे। भूकंप की झटके लगने के बाद ग्रेटर नोएडा के बुजुर्गों को दिल का दौरा पड़ गया।
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इसके अलावा पूरे दिल्ली एनसीआर में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। दिल्ली में छह इमारतों को नुकसान पहुंचने की सूचना है। वहीं नोएडा में एक दुकान के फर्श में दरार आ गई और दो इमारतें मामूली सी खिसक गईं।

नोएडा सेक्टर-५९ की एक फैक्टरी में अफवाह फैल गई कि इमारत का एक हिस्सा जमीन में धंस गया है। इससे घबराए दूसरी मंजिल पर काम कर रहे कई कर्मचारी नीचे टीन शेड पर कूद गए। एक कर्मचारी शेड से नीचे गिर गया, वह मामूली रूप से जख्मी है।
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रूक गई एनसीआर की रफ्तार

फरीदाबाद और गुडग़ांव से भी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। भूकंप के झटके लगने के बाद गुडग़ांव के मॉल और ऊंची इमारतों में काम करने वाले तुरंत बाहर आ गए। शनिवार को यहां कई ऑफिसों में छुट्टी रही है, इसलिए भीड़ और दिनों के मुकाबले कम ही  रही। इधर दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम इलाकों में तैनात कर दी गईं।

भूकंप से मेट्रो की रफ्तार और बिजली आपूर्ति भी मामूली रूप से प्रभावित हुई। दिल्ली मेट्रो ने 11.41 पर भूकंप का पहला तेज झटका आने के बाद तुरंत प्रभाव से येलो, ब्लू रेड, वायलेट, ग्रीन समेत एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो लाइन की सेवाओं को रोक दिया।

उसके बाद करीब 12:३० बजे  से १२:४५ बजे तक विभिन्न ट्रैक समेत ओएचई की जांच के बाद ट्रेन को चलाया गया, लेकिन बेहद धीमी स्पीड से। इसके अलावा दिल्ली-नेपाल हवाई सेवा पर भी असर पड़ा है।

इसलिए हुआ राजधानी पर असर

शनिवार शाम उप राज्यपाल नजीब जंग ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की उपस्थिति में दिल्ली की सभी सिविक एजेंसियों, दिल्ली पुलिस और डीडीएमए (दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के अधिकारियों के साथ बैठक की।

बैठक में भूकंप के बाद की स्थिति का जायजा लेने के साथ एलजी ने सभी अधिकारियों से किसी भी आपदा से निपटने के लिए तैयार रहने के लिए कहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप का केंद्र दिल्ली से 900 किलोमीटर से ज्यादा दूर काठमांडू में था, इसलिए इसका असर दिल्ली में कम रहा। अगर यही तीव्रता राजधानी के आसपास होती तो नुकसान बहुत ज्यादा होता।
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लोगों ने छोड़ दिए थे अपने मकान

दिल्ली एनसीआर की ६०-७० फीसदी आबादी गैर नियोजित मकानों में रहती है। इसके निर्माण के समय किसी भी तरह के मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है।

यमुना के किनारे की मिट्टी रेतीली होने के साथ नीचे गीली होती है। मौसम विभाग का कहना है कि पहला झटका 11:41 बजे लगा। देखते ही देखते लोग इमारतों को छोड़कर बाहर की तरफ भागे।

सभी इमारतें खाली हो गईं और लोग सड़कों व पार्कों में नजर आने लगे। यह झटका ३५ सेकेंड तक लगता रहा। लोग घरों और ऑफिसों में पहुंचे ही थे कि 12:15 बजे दूसरा झटका लगा, हालांकि इसकी तीव्रता पहले से थोड़ा कम थी। इसके बाद लोग काफी समय तक बाहर ही जमे रहे।
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