पटियाला हाउस अदालत की महानगर दंडाधिकारी अंबिका सिंह ने स्कूल प्रशासक फ्रांसिस थॉमस, प्रधानाचार्य संध्या साबू, कक्षा अध्यापक मीनाक्षी कपूर, मेंटीनेंस इंचार्ज पूरन सिंह बिष्ट, माली राम नारायण, पंप ऑपरेटर योगेश कुमार को प्रथम दृष्टया गैर इरादतन हत्या का दोषी माना है।
कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा कि इन आरोपियों पर इस धारा में मामला बनता है और मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। इस धारा के तहत केस की अगली सुनवाई सत्र अदालत में चार अगस्त को होगी।
अदालत ने कहा इस मामले में प्रशासक व प्रधानाचार्य ने एक दूसरे पर हादसे की जिम्मेदारी डालने की कोशिश की लेकिन यह भी आरोपी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
कक्षा अध्यापक भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रही और अन्य स्कूल कर्मचारी भी। आरोपी यह जानते थे कि वाटर टैंक में गिरने से बच्चे की मौत हो सकती है लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
मामला वसंत कुंज स्थित रेयान इंटरनेशल स्कूल का है। स्कूल में पढ़ने वाला छह साल का देवांश 30 जनवरी 2016 को अपनी कक्षा से गायब हो गया था। दोपहर करीब एक बजे वह वाटर पंप में डूबा हुआ मिला था। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
अपने बेटे देवांश को न्याय दिलाने के लिए उसके पिता रामहित मीना ने दो साल तक कड़ा संघर्ष किया। कोर्ट के फैसले के बाद वो कहते हैं, 'हमने अदालत में इसलिए याचिका डाली थी क्योंकि कम से कम किसी को तो मेरे बेटे की मौत का जिम्मेदार ठहराया जाए। हालांकि हम अब भी ये मानते हैं कि इस मामले में सीबीआई जांच होनी चाहिए।'
देवांश के माता-पिता कोर्ट के इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मानते हैं क्योंकि उनका मानना है कि स्कूल ने शुरू से ही प्रिंसिपल और स्कूल स्टाफ को इस मामले से बचाने की कोशिश की। उनका हमेशा प्रयास रहा कि प्रिंसिपल और स्कूल स्टाफ को कानूनी पचड़े में न पड़ना पड़े। अब कोर्ट के फैसले से ये दोषी करार हुए हैं।
लंबी लड़ाई के बाद कोर्ट से अपने हक में फैसला आने के बाद अब मीणा चाहते हैं कि स्कूल का लाइसेंस तब तक के लिए रद्द कर दिया जाए जब तक स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित न कर दे।
देवांश के पिता का कहना है कि जिस टैंक में गिरकर देवांश की मौत हुई थी वो अवैध था और यहां तक कि स्कूल बिल्डिंग का कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी स्कूल के पास नहीं था। इसके बावजूद स्कूल के मालिकों और स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक देवांश स्कूल के टैंक में दोपहर 12.30 बजे गिरा था, लेकिन देवांश के माता-पिता को 1 बजकर 34 मिनट पर सूचना दी गई। इस पर देवांश के पिता का कहना है कि स्कूल ने उन्हें फोन किया और बताया कि यहां इमरजेंसी हो गई है और पिता के बार-बार पूछने पर भी उन्हें कुछ जानकारी नहीं दी गई।
मीणा याद करते हुए कहते हैं कि जिस महिला ने उन्हें फोन कर देवांश के बारे में बताया था जब वह उसे पूछ रहे थे कि उनका बेटा कहां है तब उसने उन्हें शांत रहने को कहा। इसके साथ ही उसने ये भी बोला कि यह उनके और उनके परिवार के लिए अच्छा होगा कि वो शांत ही रहें।
देवांश के पिता का कहना है कि स्कूल ने ये कहकर उनके बेटे की मौत को दबाने की कोशिश की कि उसे अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी सिंड्रोम नाम की बीमारी थी। मीणा कहते हैं कि क्या ये अजीब नहीं है कि उन्होंने जो टैंक खुला रखा था उसमें गिरकर मेरे बेटे की मौत हुई और उसके लिए वो मेरे बेटे को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यह एक हत्या मामला है। देवांश का परिवार सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल चुका है।