भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को पता था कि अगर बिना सुबूत के जासूसों को पकड़ा तो पाकिस्तान शोर मचाएगा। सुरक्षा एजेंसियों ने करोल बाग के एक होटल में स्टिंग ऑपरेशन कर जासूसों की मीटिंग का वीडियो व बातचीत का वीडियो रिकार्ड कर ली। यही कारण था कि पाकिस्तान ने जासूसी कांड पर चुप्पी साध ली।
दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रेलवे के एक और कर्मचारी से पूछताछ की है। जासूस इस कर्मचारी से भी रेलवे व सेना के बारे में जानकारी लेने के लिए मिले थे। इस मामले में अब तक रेलवे के दो कर्मचारियों से पूछताछ हो चुकी है।
जासूसी मामले में पकड़े गए आबिद, जावेद और ताहिर पाक उच्चायोग में तैनात जरूर थे मगर, वह पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहे थे। आईएसआई इन तीनों को भारतीय सेना से जुड़े लोगों के नंबर देती थी।
आबिद इन नंबरों पर फोन कर खुद को आर्मी का बताकर ट्रैप में लेता था और भारतीय सेना के बारे में खुफिया जानकारी लेने की कोशिश करता था। भारतीय सेना की इंटेलीजेंस यूनिट को इसकी भनक लग गई।
इन तीनों पर नजर रखी गई और आर्मी इंटेलीजेंस के अफसर ने प्लान बनाकर इनसे करोलबाग के एक होटल में मीटिंग तय की। यहां पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने स्टिंग ऑपरेशन प्लान किया।
वीडियो में दिख रहा है कि आबिद होटल में प्रवेश करता है और मीटिंग में दावा करता है कि 11 क्लर्क उससे जुड़े हुए हैं और चार काम में लगे हुए हैं। स्पेशल सेल के पुलिस अधिकारियों के अनुसार आईएसआई के गुप्त प्लान के तहत ये वर्ष 2013 में दिल्ली स्थित वीजा सेक्शन में काम करने लगे थे।
प्लान के तहत एक उच्चायोग का ड्राइवर बन गया था। आबिद व ताहिर खुद को भारतीय सेना का क्लर्क बताते थे और खुद की पोस्टिंग दिल्ली स्थित भारतीय आर्मी के पोस्ट ऑफिस सेंट्रल बोर्ड में बताकर भारतीय सेना में सेंध लगाने में जुटे थे।
आईएसआई इनको हर महीने मोटी रकम पहुंचाती थी। आईएसआई देश के सभी संवेदनशील बॉर्डर पर सेना की तैनाती व हथियारों की खेप की जुड़ी जानकारी हासिल करना चाहते थे। इन्होंने करोल बाग के होटल में अपना परिचय भारतीय सेना के क्लर्क के तौर पर बताया था।