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पड़ताल : रोक के बावजूद 236 सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं ई-रिक्शे, एक साल में काटे गये 2,78,090 चालान

Thu, 17 Apr 2025 02:29 AM IST
दुष्यंत शर्मा राम नरेश, नई दिल्ली

सार

आलम यह है कि मेट्रो स्टेशनों, बस स्टैंडों और प्रमुख चौराहों पर ई-रिक्शा का जमावड़ा इतना अधिक हो गया है कि अन्य वाहन चालकों को जाम से जूझना पड़ता है।
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demo - फोटो : संवाद
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विस्तार
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राजधानी में 236 सड़कों पर ई-रिक्शा चलाने पर रोक है। आलम यह है कि मेट्रो स्टेशनों, बस स्टैंडों और प्रमुख चौराहों पर ई-रिक्शा का जमावड़ा इतना अधिक हो गया है कि अन्य वाहन चालकों को जाम से जूझना पड़ता है। विकास मार्ग, मदर डेयरी मार्ग, कड़कड़ी मोड़, टोडापुर रोड, पायल सिनेमा, रिंग रोड और नजफगढ़ रोड सहित कई प्रतिबंधित सड़कों पर ई-रिक्शा बेरोकटोक दौड़ते नजर आते हैं। एक वर्ष में ट्रैफिक पुलिस ने ई-रिक्शा के खिलाफ विभिन्न ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर 2,78,090 चालान तक काटे हैं। फिर भी इन पर लगाम नहीं लग पा रही है।

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अमर उजाला ने बुधवार को पड़ताल की तो प्रतिबंधित मार्गों पर ई-रिक्शा दौड़ते नजर आए। कहीं माल ले जाया रहा था, तो कहीं क्षमता से ज्यादा सवारियों को बैठाया जा रहा था। लक्ष्मी नगर स्थित विकास मार्ग पर दर्जनों ई-रिक्शा जहां-तहां खड़े नजर आए, जिससे मार्ग पर यातायात प्रभावित होता दिखा। वहीं, प्रीत विहार के पास कड़कड़ी मोड़ पर ई-रिक्शा की भारी आवाजाही के कारण अन्य वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा शकरपुर स्थित मदर डेयरी रोड पर अव्यवस्थित तरीके से ई-रिक्शा चल रहे थे।

50 हजार के पास नहीं फिटनेस प्रमाणपत्र
परिवहन विभाग के अनुसार, राजधानी में करीब 1.5 लाख ई-रिक्शा संचालित हैं, जिनमें से लगभग 50,000 के पास फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं हैं। विभाग ने अवैध ई-रिक्शों को जब्त करने और उन्हें सात दिनों के भीतर स्क्रैप करने का नियम लागू किया है। इसके अलावा लाइसेंस प्राप्त ई-रिक्शा, जिनकी फिटनेस नहीं हुई है, उन्हें भी जब्त करने की योजना है। विभाग ने विशेष टीमें गठित की हैं, जो इन नियमों का उल्लंघन करने वाले रिक्शों पर नजर रखेंगी।
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बढ़ रही बिजली चोरी
अवैध ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या न केवल ट्रैफिक, बल्कि बिजली चोरी और सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर समस्या बनती जा रही है। कई ई-रिक्शा चालक गैरकानूनी तरीके से बिजली की चोरी कर वाहनों को चार्ज करते हैं, जिससे बिजली वितरण कंपनियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। अधिकतर चार्जिंग प्वाइंट बिना किसी सुरक्षा उपायों के चलते हैं, जिससे आग लगने और करंट की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, घटिया गुणवत्ता वाली बैटरियों का उपयोग और असुरक्षित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लोगों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। हाल ही में उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शालीमार बाग में एक अवैध चार्जिंग पॉइंट के पास खुले तार की चपेट में आकर सात वर्षीय बच्चे की मौत हो गई थी।

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