बाजार में 1000 और 500 रुपये के नोट बंद होने से डिपार्टमेंटल स्टोर्स और भंडार गृहों में भी बदलाव दिखने लगा है। यहां लोग प्लास्टिक मनी से खरीदारी करने पहुंच रहे हैं। चार में से एक ग्राहक ही कैश लेकर आ रहा है। हजार से लेकर 50,000 रुपये तक की खरीदारी प्लास्टिक मनी से हो रही है।
छोटे नोट होते हुए भी लोग उन्हें खर्च नहीं करना चाह रहे हैं। ऐसे में बाजार कैशलेस होता जा रहा है। बीते पांच दिनों में छोटे से लेकर बड़े बाजारों की दुकानों में स्वाइप मशीन लगाने को प्राथमिकता दी गई है, ताकी कारोबार पर फर्क न पड़े।
बैंकों में भी स्वाइप मशीन को लेकर दुकानदारों ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। पीएनबीए एसबीआइए बैंक ऑफ बड़ौदा की कई शाखाओं में स्वैप मशीन के लिए करंट एकाउंट दुकानदारों ने खुलवाए हैं। नोट बदलने की आपाधापी के बीच बैंक इनके करंट अकाउंट खोल रहे हैं।
बैंक अधिकारियों की मानें तो रोजाना कम से कम 50 से 70 व्यापारी करंट अकाउंट खुलवा रहे हैं। अधिकांश ने प्लास्टिक मनी से बिल का भुगतान किया। लोगों ने राशन के अलावा अन्य सामान भी खरीदा। सेक्टर 10 स्थित पंतजलि स्टोर के प्रबंधक सुनील गोयल ने बताया कि स्वैप मशीन होने के कारण उन्हें दिक्कत नहीं आ रही है।
ग्राहक पहले की भांति कार्ड से ही पेमेंट किया। सेक्टर 64 स्थित गोविंद जनरल स्टोर के मालिक सोमदत्त ने बताया कि नोट बंदी होने के कारण काम आधा भी नहीं रह गया है। इसलिए स्वाइप मशीन के लिए आवेदन किया हे। ओम रिटेल बाजार के अंकुश गोयल ने बताया कि स्वाइप मशीन की अचानक डिमांड बढने से अब डिलीवरी में देरी हो रही है।
उधार में दिया जा रहा सामान
कालोनियों एवं मुहल्लों में छोटी दुकानों पर उधार में सामान दिया जा रहा है। आदर्श नगर स्थित किराने की दुकान चलाने वाले राजीव ने बताया कि खुले रुपये नहीं होने के चलते राशन उधार दे रहे हैं। 15 से बीस दिन में अर्थ व्यवस्था ठीक हो जाएगी। लोगों की जेब में रुपये आ जाएंगे तब पैसे तो मिल ही जाएंगे।