बारिश का मौसम खत्म होने के बाद अचानक से मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। खासकर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे बीमारी देने वाले घातक मच्छरों का। इनको मारने के लिए केमिकल का प्रयोग किया जाता है। इससे न ही पूरी तरह मच्छर मर पाते हैं और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। ऐसे में डीयू के वनस्पति शास्त्र विभाग ने द्वारका स्थित राष्ट्रीय मलेरिया शोध संस्थान के साथ एक रिसर्च की है। जिसमें विभाग ने डेंगू व चिकनगुनिया जैसे मच्छरों को मारने के लिए एक हर्बल दवा तैयार की है।
डीयू के वनस्पति शास्त्र विभाग में प्रोफेसर डॉ. वीना अग्रवाल ने बताया कि इस दवा को तैयार करने में औषधीय गुणों से भरपूर इंद्रजी पेड़ की छाल का प्रयोग किया गया है। इस छाल से गंदगी को निकालने के लिए साफ पानी से काफी बार धोया गया। कमरे के तापमान पर इसे 72 घंटे तक सुखा कर चूर्ण बनाया गया। इसे लैब में नैनो पार्टिकल स्तर पर संसाधित करने के बाद हर्बल दवा तैयार हुई। इस दवा का प्रयोग डिपार्टमेंट के लैब में मच्छरों और लार्वा को मारने के लिए किया गया।
टेस्ट ट्रायल में यह देखा गया कि इसके प्रयोग से 100 फीसदी मच्छर व लार्वा खत्म हो गए। इस दवा की विशेषता यह है कि इससे न ही भूमि प्रदूषण होगा और न ही हवा खराब होगी। उनकी इस शोध को अमेरिका की एक पत्रिका प्रोसेस सेफ्टी एंड एनवॉयरमेंटल प्रोटेक्शन में भी प्रकाशित किया जा चुका है।
अब तक सरकार व संस्था ने नहीं दिखायी रुचि
यह हर्बल दवा के कारगर होने के बावजूद अब तक किसी सरकार, संस्था व कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई है। डॉ. वीना ने कहा कि यदि कोई सरकार या संस्था रुचि दिखाए, तो हम इस दवा के लिए उनसे बातचीत कर सकते हैं। इसका टेस्ट ट्रायल भी काफी सफल रहा है। विभाग चाहता है कि रसायनिक दवाओं की जगह इस दवा का प्रयोग बड़े स्तर पर किया जाए, जिससे कि हवा भी शुद्ध बनी रहे।