डेंगू के चलते भादस गांव की एक बच्ची की मौत हो गई। बच्ची के अभिभावक बीमार बच्ची को लेकर इस अस्पताल से उस अस्पताल भागते रहे। यहां के सरकारी अस्पतालों में उसका इलाज न होने पर उसे राजस्थान के अलवर ले जाया गया, जहां 27 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।
उधर मलेरिया अधिकारी का कहना है कि वह डेंगू के बारे में निजि अस्पताल की रिपोर्ट नहीं मानते। भादस निवासी सुखबीर सैनी की पुत्री सोनम अल-फलाह स्कूल की सातवीं कक्षा में पढ़ती थी। बुखार होने के बाद स्कूल ने छात्रा को मांडीखेड़ा अलआफिया अस्पाल पहुंचाया।
वहां से डॉक्टरों ने उसे नल्हड़ रेफर कर दिया। नल्हड़ में भी डेंगू का टेस्ट न होने के कारण अभिभावक उसे वधवा नर्सिंग होम ले गए। लैब की जांच में 23 अप्रैल को डेंगू होने की पुष्टि हुई।नर्सिंग होम के डॉ.सीपी वधवा ने मांड़ीखेड़ा अस्पताल को इसकी सूचना दी। फिर सोनम को उसके अभिभावक मांड़ीखेड़ा ले आए लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया।
नल्हड़ मेडिकल कॉलेज से चक्कर काटकर अभिभावक अलवर के मित्तल हॉस्पिटल ले गये। वहां से अलवर के ही सेठी चिल्ड्रन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहां दो दिन बाद सोनम की मौत हो गई।
पिता सुखबीर ने बताया कि सरकारी अस्पतालों ने उनका साथ नहीं दिया, इसलिए उनकी बेटी की मौत हुई है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर डेंगू के कारणों की जांच के लिए कमेटी बनाने की अपील की है। ये भी कहा है कि यदि अभी से डेंगू फैला तो गांवों में जिन बच्चों को बुखार है उनका भी टेस्ट हो।
वधवा नर्सिंग होम के डॉक्टरों ने डेंगू की पुष्टि करते हुए कहा कि ये रिपोर्ट सही है और हमने जिला स्वास्थ्य विभाग मांड़ीखेड़ा को सोनम के बारे में सूचित किया था। सीएचसी प्रभारी डॉ. नीतिश अग्रवाल का कहना है कि शिकायत मिलने पर नमूने लिए जाएंगे। मलेरिया अधिकारी का कहना है कि यह प्राइवेट अस्पताल की रिपोर्ट है। हम इसे नहीं मानते।