पिछले छह महिने से मेवात के व्यापारियों पर संकट के बादल छाये हुऐ हैं जो छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक कांड होने से मेवात इलाके के करीब पांच हजार से अधिक व्यापारियों कि रोजी-रोटी का संकट खडा हो गया है।
वहीं पशु मेले के ठेकेदारों को पिछले छह महिने से कमाना तो दूर उनको करीब तीन लाख रूपये सप्ताह का घाटा हो रहा है। पहलू हत्याकांड से पशु काराबार 90 फीसदी घट गया है।
मेवात के एक मात्र पशु मेला फिरोजपुर झिरका में जहां 6 महिने पहले 800 से एक हजार पशु हर सप्ताह आ जाते थे अब वे घट कर 50-60 पशुओं तक ही सिमट कर रहे गये हैं।
फिरोजपुर झिरका स्थित पशु पैंठ (पशु मैला) सप्ताह में सोमवार और मंगलवार को भैंड, कटरा, गाय, बैल के लिये लगता है, जबकी बृहस्पतिवार को बकरा, बकरी, भैड और मुर्गियों के लिये खरीदने और बैचने के लिये पैंठ लगती है।
यह पशु पैंठ फिरोजपुर झिरका नगरपालिका द्वारा पिछले करीब 15 सालों से एक साल के ठेके पर छोडी जाती है। गत वर्ष यह पैंठ एक करोड 91 लाख रूपये में एक साल के लिऐ छोडी गई थी।
फिरोजपुर झिरका पैंठ में राजस्थान के नगर, जयपुर और उत्तर प्रदेश के कौसीकलां पशु मेलों से व्यापारी खरीदकर यहां बैचने के लिये लाते हैं। इसके अलावा व्यापारी राजस्थान के बहरोड, राजगढ, दौसा और हरियाणा के रेवाडी और महेंद्रगढ जिलों से पशु गांवों से खरीदकर लाकर यहां बैचते हैं।
फिरोजपुर झिरका पशु पैंठ से भैंस, कटरा आदि पशुओं को खरीदने के लिये उत्तर प्रदेश के बडे-बडे व्यापारी आते रहे हैं या फिर मेवात के बडे व्यापारी खुद उत्तरप्रदेश के बुचडखानों में लेजाकर अपने पशुओं को महगें दामों पर बैचकर अच्छा मुनाफा कमा लेते हैं।
फिरोजपुर झिरका पशु पैंठ को पहली जुलाई 2016 को सबसे ऊंची बोली लगाने वाले याकूब कांमेडा को एक करोड 91 लाख रूपये में एक साल के लिये ठेके पर छोडी थी। अधिक राशी होनी वजह से याकूब ने नूरशाह सहित आठ और लोगों को अपना हिस्सेदार बना लिया। ठेकेदार को हर सप्ताह तीन लाख 80 हजार रूपये नगरपालिका में पैंठ कि किस्त जमा करनी पडती है।