अपने अफसर के भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए एक कर्मचारी ने रिश्वत में देकर जो पचास हजार रुपये पकड़वाए थे वही रुपये करीब दो साल बाद उसके लिए मुसीबत बन गए हैं। सहारनपुर निवासी पीड़ित को इस मुकदमे के दौरान जितनी परेशानी उठानी पड़ी उससे ज्यादा परेशानी अब पुराने एक-एक हजार के नोट बदलवाने को लेकर उठानी पड़ रही हैं।
नोटबंदी के बाद बैंकों में नोटबदली की तिथि निकलने के बाद इन नोटों को बदलवाने से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मना कर दिया है। अब एक सप्ताह से पीड़ित मेरठ कोर्ट व आरबीआई के बीच चक्कर काट रहा है।
गांव अनंत मऊ सहारनपुर निवासी हेम सिंह की गन्ना विकास समिति से क्लर्क के रूप में वर्ष 2013 में सेवानिवृत्ति हो गई थी। आरोप था कि गन्ना विकास समिति सचिव प्रभारी अजय प्रताप सेवानिवृत्ति देय दिलाने के लिए पचास हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहा है।
इस मामले की शिकायत हेम सिंह ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन से की और संगठन ने कार्रवाई करते हुए हेम सिंह के दिए एक-एक हजार रुपये के पचास नोटों के साथ अजय को 16 अप्रैल 2015 को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस मुकदमे के चलने के दौरान ही वे ट्रोनिका सिटी, लोनी जिला गाजियाबाद शिफ्ट हो गए।
आठ नवंबर को पांच सौ व हजार रुपये के नोट बंद हो जाने के बाद हेम सिंह को अपने पचास हजार रुपये को लेकर चिंता हुई। उन्होंने अदालत में आवेदन दिया कि पुराने नोट बदलने की तिथि केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर 16 जारी की है। ऐेसे में उसे उसके रुपये दिलवाए जाएं ताकि वे उनका उपयोग कर सकें।