नोएडा में लगने वाले संडे बाजार पर भी नोटबंदी की मार दिखी। रविवार को यहां स्थानीय लोगों के लिए लगने वाले बाजार में ग्राहकों की कमी रही। दुकानदार भी लोगों के ना आने के लिए नोटबंदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सेक्टर-1 के संडे बाजार मेें कपड़े की दुकान लगाने वाले मोहम्मद फिरोज ने बताया कि पिछले तीन सप्ताह से यही हाल है। लोगों के पास नकदी की कमी है, इसलिए आ नहीं रहे हैं। हमारे पास ऐसा कोई सिस्टम भी नहीं है कि कार्ड से पैसे लिए जाएं, इसलिए यह पूरा सौदा घाटे का साबित हो रहा है।
इसी तरह से जसवंत ने बताया कि कुछ लोग 2000 का नोट लेकर आते हैं। लेकिन अब खुल्ले की कमी है। लिहाजा वे छुट्टे नहीं दे पाते हैं और उनका सामान धरा का धरा रह जाता है। सामान नहीं बिकेगा तो घर का खर्च कैसे चलेगा।
हर सप्ताह हो रहा घाटा
दुकानदारों का कहना है कि यहां साप्ताहिक बाजार में दुकान लगाने वाले दुकानदारों के भी अपने खर्च हैं, जिनको उन्हें चुकाना पड़ता है। इसके अलावा सामान बेचने के लिए वह अलग-अलग सेक्टरों से आते हैं। इसको लाने व ले जाने में भी खर्च आता है। ऐसे में अगर सामान की बिक्री नहीं होगी तो घाटा ही होगा।
सस्ते सामान का है सबसे बेहतर बाजार
साप्ताहिक बाजार के माध्यम से मध्यम वर्गीय परिवारों के लोग मोलभाव कर सस्ते मेें सामान की खरीद करते हैं, लेकिन फिलहाल बाजार में कैश की कमी की वजह से वे वहां तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि उनके पास छोटे नोट की कमी है और जो 2000 का नोट है उसका छुट्टा इस बाजार में संभव ही नहीं है।