ग्रेटर नोएडा में बीते सुबह सात बजे ही प्राधिकरण अफसर दो थानों की पुलिस फोर्स लेकर कुलेसरा पहुंच गए। आनन-फानन में अवैध रूप से बने 20 मकान ध्वस्त भी कर दिए गए। यह बात पूरे गांव में आग की तरह फैल गई और लोग जमा होने लगे।
लोगों ने अपने घर तोड़े जाने का विरोध किया तो पुलिस ने उन लोगों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। पुलिस की बर्बरता को देखते हुए लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया और दादरी-नोएडा रोड पर आ गए। दादरी-नोएडा मुख्य रोड से करीब दो किलोमीटर दूरी पर यह अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा था।
इसी का लाभ उठाकर लोगों ने आगजनी और तोड़फोड़ कर दी। जब तक पुलिस को घटना की सूचना मिली तब तक लोगों ने कोहराम मचा दिया था। साफ है कि अतिक्रमण हटाने के लिए प्राधिकरण और पुलिस टीम पूरी तरह तैयार होकर नहीं आई थीं। यही कारण है कि कुलेसरा में इतनी बड़ी घटना हो गई।
क्या हुआ परिणाम
करीब दो घंटे तक कुलेसरा में भट्टा-पारसौल जैसे हालात बने रहे। कभी भीड़ पुलिस पर भारी पड़ी तो कभी पुलिस भीड़ पर। पुलिस ने देर शाम से ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू कर दिया था। वीडियो फुटेज के जरिये भी कुछ लोगों की पहचान की गई है।
प्राधिकरण ने करीब दो सप्ताह से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में अतिक्रमण को ध्वस्त करने के लिए अभियान चला रखा है। दो दिन पहले बिसरख और फिर सैनी-सुनपुरा में अतिक्रमण हटाया था। बिसरख और सैनी के किसानों ने भी प्राधिकरण का विरोध किया था और अपनी आबादियों का फिर से निर्माण कराना शुरू कर दिया।
इसके बाद भी प्राधिकरण तथा पुलिस अधिकारी सतर्क नहीं हुए। लोगों के मकानों को तोड़फोड़ करने के लिए सुबह का समय चुनते थे और सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। इसी का नतीजा है कि इतना बड़ी घटना हुई।
बिना तैयारी के इस तरह की कार्रवाई का अंजाम यही होता है
कुलेसरा में सोमवार को अवैध निर्माण गिराने के बाद हुई ग्रामीणों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बिना तैयारी के इस तरह की कार्रवाई का अंजाम यही होता है।
बिना सूचना दिए अवैध निर्माण गिराने पहुंची प्राधिकरण की टीम की कार्रवाई के बाद पुलिस बल को ग्रामीणों के भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा।