दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने शास्त्रार्थ को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए बहस और संवाद का स्तर गरिमापूर्ण, तथ्य आधारित और रचनात्मक होना जरूरी है। शास्त्रार्थ का उद्देश्य किसी को हराना नहीं बल्कि तर्क और विचार-विमर्श के माध्यम से सत्य की खोज करना है। शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान परंपरा की आत्मा है। वे इंडिया हैबिटेट सेंटर में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) और भारत बोध केंद्र की ओर से आयोजित ‘वर्तमान समय में शास्त्रार्थ’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उपनिषदों के संवाद और आदि शंकराचार्य-मंडन मिश्र के शास्त्रार्थ का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि आज सूचना के साधन बढ़े हैं लेकिन धैर्य से सुनने और अलग विचारों को समझने की प्रवृत्ति कम हो रही है। स्वस्थ समाज और लोकतंत्र के लिए मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाने की संस्कृति विकसित करनी होगी। गुप्ता ने कहा कि विधानमंडलों में होने वाली चर्चाएं प्राचीन शास्त्रार्थ परंपरा का आधुनिक रूप हैं। बेहतर निर्णय और सुशासन के लिए सदनों में सार्थक विमर्श जरूरी है। उन्होंने युवाओं और नागरिकों से सम्मानजनक संवाद संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की।