राष्ट्रपति द्वारा 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति संबंधी बिल को वापस करने के बाद अब इन सचिवों (विधायकों) के भविष्य को लेकर चुनाव आयोग के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने आयोग को अपना जवाब दाखिल कर सभी विधायकों को जल्द से जल्द अयोग्य ठहराने के अलावा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और इन सभी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज करने की मांग की है।
मामले में याचिकाकर्ता एवं भाजपा नेता विवेक गर्ग ने 21 संसदीय सचिवों द्वारा आयोग को दिए गए जवाब पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा है कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है और माननीय राष्ट्रपति ने इन संसदीय सचिवों को वैध ठहराने के लिए विधानसभा में पास प्रस्ताव संबंधी बिल को खारिज कर दिया है। ऐसे में स्वयं ही यह नियुक्तियां अवैध हो गई हैं।
इन लोगों ने रचा षडयंत्र
केजरीवाल
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उन्होंने कहा कि 21 संसदीय सचिवों ने आयोग के समक्ष शपथपत्र सहित दायर जवाब में झूठी जानकारी दी है और यह भी एक अपराध है। आरटीआई के जवाब से स्पष्ट है कि इन सभी को अलग से कार्यालय के अलावा अन्य सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। वहीं, इन सभी ने जवाब में कहा है कि उन्हें कोई सुविधा प्रदान नहीं की गई।
याची गर्ग ने कहा कि सभी तथ्यों से स्पष्ट है मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और इन 21 संसदीय सचिवों ने एक षड्यंत्र रचा है। आपसे आग्रह है कि मामले की अहमियत को देखते हुए अपना फैसला जल्द से जल्द दें। फर्जी और झूठे जवाब देने पर इन सभी 21 संसदीय सचिवों को अयोग्य ठहराने के अलावा उनके छह वर्ष तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जाए।
इसके अलावा मुख्यमंत्री सहित अन्य सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 193, 199, 181,177, 120बी, 409 और 420 के तहत फर्जी शपथपत्र दायर करने, फर्जी जवाब, फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, आपराधिक षड्यंत्र रचने इत्यादि के अलावा जनप्रतिनिधित्व एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। वहीं, 21 संसदीय सचिवों से खर्च की गई राशि वसूली जाए।