- डीटीयू में अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस के मौके पर जुटे पर्यावरण वैज्ञानिक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय ओजोन दिवस पर मंगलवार को दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) में पर्यावरण वैज्ञानिक और नीति विशेषज्ञ जुटे। इसमें वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओसी) की व्यापक निगरानी की तत्काल आवश्यकता, ओजोन परत और जन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए मजबूत जलवायु कार्रवाई पर जोर दिया गया। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उन्नत वीओसी निगरानी तंत्र की मांग की गई।
इस कार्यक्रम का विषय विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई था। इसका आयोजन पर्यावरण विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अपर निदेशक डॉ. एसके त्यागी ने भारत के प्रमुख नगरीय केंद्रों में एक समर्पित वीओसी निगरानी तंत्र स्थापित करने के लिए ठोस प्रमाण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत 2019-2025 की अवधि में 11,211 करोड़ आवंटित होने के बावजूद केवल 68 फीसदी का ही प्रभावी उपयोग हुआ। क्षमता निर्माण और निगरानी जैसे महत्वपूर्ण घटकों को मात्र चार फीसदी आवंटन प्राप्त हुआ है, जिसे तत्काल बढ़ाना आवश्यक है।
भारतीय नगरों में भूतल ओजोन प्रदूषण के चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। दिल्ली में 2024 में 75 दिन घंटे भर के ओजोन मानदंड का उल्लंघन दर्ज किया गया। जबकि मुंबई में ऐसे दस दिन रहे। यह आंकड़े व्यवस्थित वीओसी पूर्वगामी निगरानी की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। विशेषज्ञ डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि ओजोन सुरक्षा और जलवायु कार्रवाई की परस्पर संबद्ध प्रकृति पर बल दिया और कहा कि ओजोन क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने से पहले ही 0.5°Cतक की वैश्विक तापवृद्धि को रोका जा चुका है।
इस कार्यक्रम में डीटीयू कुलपति प्रो. प्रतीक शर्मा, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार, पर्यावरण विज्ञान एवं आभियांत्रिकी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. गीता सिंह, संयोजक डॉ. राजीव कुमार मिश्रा सहित अन्य वक्ताओं के साथ संवाद किया। वक्ताओं ने बेहतर नीति वकालत, टिकाऊ शीतलन प्रौद्योगिकियों में वैज्ञानिक नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का समर्थन करने वाले जीवनशैली विकल्पों का आह्वान किया।