माल की कीमत के साथ परिवहन और मजदूरी का बोझ बढ़ा, छोटे ऑर्डर में अधिक महसूस हो रही लागत
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। चांदनी चौक के कारोबार में अब माल की कीमत के साथ डिलीवरी का खर्च भी व्यापारियों के लिए अहम हो गया है। दुकान से ग्राहक के घर, दुकान या गोदाम तक माल पहुंचाने के लिए वाहन, लोडिंग-अनलोडिंग और मजदूरी पर खर्च करना पड़ता है। छोटे ऑर्डर में यह लागत कारोबारियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
कारोबारी शमशेर सिंह के मुताबिक, पहले कई ग्राहक खुद वाहन की व्यवस्था कर माल ले जाते थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में ग्राहक दुकान से ही अपने पते पर माल पहुंचाने की सुविधा चाहते हैं। ऐसे में व्यापारियों को डिलीवरी की व्यवस्था करनी पड़ती है। कुछ मामलों में इसका खर्च ग्राहक से अलग लिया जाता है, जबकि कई बार ग्राहक को बनाए रखने के लिए व्यापारी खुद यह खर्च उठाते हैं।
बाजार से सामान बाहर निकालने में वक्त लगता है
कारोबारी गोकुल मित्तल ने बताया कि चांदनी चौक की मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही के समय को लेकर लागू प्रतिबंधों के कारण बाजार से माल बाहर निकालने में अतिरिक्त समय लगता है। इससे स्थानीय डिलीवरी भी प्रभावित होती है। डिलीवरी खर्च बढ़ने से व्यापारियों का मार्जिन घटता है या ग्राहक की कुल खरीद लागत बढ़ जाती है।
दूरी-मात्रा के अनुसार दरें अलग-अलग होती हैं
कपड़ा व्यापारी आलोक अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल डिलीवरी खर्च में अंतर देखने को मिल रहा है। दूरी, माल की मात्रा और वाहन के अनुसार दरें अलग-अलग होती हैं। ऐसे में डिलीवरी खर्च अब कारोबार की नियमित लागत का हिस्सा बन गया है।