राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने प्रतिनिधित्व, चुनौतियों और संभावनाओं पर रखे सुझाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। भारत में अधीनस्थ रैंक के पुलिस बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनकी भूमिका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। मंगलवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस, प्रशासन, महिला अधिकार और नीति निर्माण से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञों ने प्रतिनिधित्व, चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
संगोष्ठी में पूर्व डीजी होमगार्ड दिल्ली नुजहत हसन, पूर्व आईपीएस अधिकारी अमोद कंठ, पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई, राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन और ‘वुमेन ऑफ द एलिमेंट्स’ की संस्थापक रश्मि आनंद सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि पुलिस बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न केवल कानून-व्यवस्था को अधिक संवेदनशील और प्रभावी बनाती है, बल्कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के बेहतर निस्तारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
महिला कर्मियों की संख्या बढ़ाने, कार्यस्थल पर अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने और नेतृत्व स्तर तक उनकी पहुंच मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान किशोर न्याय प्रणाली, बाल संरक्षण कानून, महिला सुरक्षा, हिरासत में महिलाओं के अधिकार, पीड़ित सहायता तंत्र और पुलिस संगठनों में लैंगिक संतुलन जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर सत्र में विशेषज्ञों से संवाद कर अपने विचार और सुझाव भी साझा किए। संगोष्ठी का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि पुलिस बल में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी एक समावेशी, संवेदनशील और उत्तरदायी पुलिस व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।