डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग में आए मधुमेह रोगियों में वजन घटाने पर स्तर में कमी पाई गई है। ऐसा देखा गया है कि जो मरीज पहले मधुमेह की बॉर्डर लाइन पर थे, वह प्री डायबिटीज में आ गए। वहीं प्री डायबिटीज के मरीजों का मधुमेह स्तर सामान्य हो गया।
वजन घटाकर मधुमेह के खतरे को कम किया जा सकता है। डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग में आए मधुमेह रोगियों में वजन घटाने पर स्तर में कमी पाई गई है। ऐसा देखा गया है कि जो मरीज पहले मधुमेह की बॉर्डर लाइन पर थे, वह प्री डायबिटीज में आ गए। वहीं प्री डायबिटीज के मरीजों का मधुमेह स्तर सामान्य हो गया।
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विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना 10 हजार कदम चलने वाले लोगों में मधुमेह होने का खतरा कम रहता है। इसके अलावा यदि कोई प्री डायबिटीज भी हो गया तो उनमें भी सुधार होता है। घटी शारीरिक गतिविधियों के कारण युवाओं में मधुमेह का स्तर बढ़ रहा है। इसके रोकने के लिए खानपान में बदलाव के साथ शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाना होगा।
अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पुलिन गुप्ता ने बताया कि विभिन्न शोध बताते हैं कि पांच से 10 किलो तक वजन घटाने पर मधुमेह के स्तर में तेजी से सुधार होता है। यदि कोई प्रतिदिन 10 हजार कदम चलता है तो मधुमेह होने का खतरा कम रहता है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोगों की शारीरिक बनावट में हाथ-पैर पतले और पेट मोटा होता है। इसके अलावा खाने में प्रोटीन की मात्रा कम और कार्बोहाइड्रेट की ज्यादा होती है। इसके कारण अन्य देशों के मुकाबले भारतीयों में मधुमेह होने की आशंका ज्यादा रहती है। इससे बचने के लिए खानपान में सुधार के साथ शारीरिक गतिविधि को बढ़ाना होगा।
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डॉ. पुलिन ने कहा कि विभाग की ओपीडी में रोजाना करीब एक हजार मरीज इलाज करवाने आते हैं। इनमें करीब 200 मरीज मधुमेह के कारण इलाज करवाने आते हैं। इन 200 मरीजों में करीब 35 फीसदी आंकड़ा युवाओं का होता है। यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। पहले 50 साल के बाद के लोगों में मधुमेह होने की आशंका ज्यादा रहती थी।
मधुमेह रोगियों में बढ़ीं समस्याएं
मधुमेह के करीब 75 फीसदी रोगियों में फैटी लीवर की समस्या बढ़ी है। इसके अलावा किडनी, दिल सहित दूसरे रोग भी बढ़ रहे हैं। इसे रोकने के लिए मधुमेह के स्तर को कम करना होगा। साथ ही जरूरत के आधार पर विशेषज्ञ से भी सलाह लेनी चाहिए।