वर्तमान में यमुना नदी पर रेलवे के दो पुल हैं। सबसे पुराना पुल 1866 में अंग्रेजों ने बनवाया था, जिसे लोग आम भाषा में लोहे का पुल कहते हैं। रेलवे की तकनीकी भाषा में इसे रेल रोड ब्रिज कहा जाता है। यह पुल ऐतिहासिक महत्व रखता है। इसका निर्माण महज तीन वर्षों में पूरा किया गया था। इसके ऊपर ट्रेनें और नीचे गाड़ियां चलती हैं। यह पुल दिल्ली को हावड़ा से जोड़ने वाला पहला बड़ा रेलवे कनेक्शन था। लोहे का पुल अपनी तकनीकी उम्र पूरी कर चुका है। इसकी ऊंचाई कम होने के कारण बाढ़ के समय यह जलस्तर के संपर्क में भी आ जाता है। सुरक्षा के लिहाज से इस पुल से गुजर रहीं ट्रेनों को धीरे चलने की हिदायत दी गई है। इससे ट्रेन संचालन में अक्सर देरी होती है।
इसलिए अहम है नया पुल...
पुराने लोहे के पुल पर ट्रेनों का संचालन 10 किमी की रफ्तार से किया जाता है। मानसून के दौरान अधिक बारिश और अन्य कारणों से यमुना नदी का जलस्तर अधिक होता है तो पुल पर ट्रेनों की आवाजाही बंद कर दी जाती है। ट्रेनों को दूसरे पुल पर डायवर्ट कर दिया जाता है। ऐसे में गाजियाबाद से दिल्ली को आने और जाने वाली ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होता है। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी ट्रेनों का दबाव बढ़ता है। नए पुल से सुविधा होगी कि इस पर ट्रेनों की रफ्तारी 20 किमी प्रतिघंटा से चल सकेंगी और यमुना में जलस्तर अधिक होने पर भी पुल को बंद करने की जरूरत नहीं होगी। दूसरी ओर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि नया पुल शुरू होते ही पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलने वाली ट्रेनों को सीधा रास्ता मिलेगा। इससे नई दिल्ली स्टेशन से कुछ ट्रेनों को पुरानी दिल्ली स्थानांतरित करना संभव होगा, खासकर पूर्वांचल व बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों को।
1998 मंजूरी, 2003 में शुरू हुआ निर्माण...
नया पुल बनाने की योजना को 1997-98 में एप्रोवल मिला और 2003 में निर्माण का काम शुरू किया गया। हालांकि, इसमें लगातार विलंब होता रहा। अधिकारियों का कहना है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) व अन्य एजेंसियों से एप्रोवल लेना पड़ा था, जिससे करीब पांच साल का विलंब हुआ। इसके बाद डिजाइन में बदलाव किया गया, तकनीकी दिक्कतें व कार्य अवरोध के कारण काम बार-बार अटका। निर्माण का काम वर्ष 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य था, जिसे बाद में 2018, फिर 2020 और अंततः सितंबर 2023 तक बढ़ाया गया। अब रेलवे का दावा है कि इस साल मानसून के बाद इस पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकता है।
यह यमुना नदी पर तीसरा रेलवे पुल होगा। पहला पुल ऐतिहासिक रेल रोड ब्रिज है, जो ट्रेन और सड़क यातायात दोनों के लिए इस्तेमाल होता है। दूसरा पुल प्रगति मैदान के पास स्थित है। नए पुल के शुरू होने से ट्रेन संचालन की गति और क्षमता दोनों में सुधार होगा। -हिमांशु शेखर उपाध्याय, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर रेलवे