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यमुना के प्रदूषण को कम करने के लिए डीएनडी के पास शुरू हुआ पहला वेटलैंड

Wed, 23 Dec 2020 04:34 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • बाकी अन्य 10 वेटलैंड भी 2021 के मध्य तक होंगे शुरू
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यमुना नदी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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यमुना के प्रदूषण को कम करने के लिए 11 वेटलैंड बनाए जाने की कड़ी में डीएनडी के पास पहला वेटलैंड शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य वेटलैंड भी 2021 के मध्य तक शुरू होने की संभावना है। डीएनडी के पास 115 हेक्टेयर में वेटलैंड को तैयार किया गया है जो प्रतिदिन 15 से 20 मिनियन गंदे पानी को उपचारित करेगा। इस वैटलैंड को पौधों के माध्यम से तैयार किया गया है। वेटलैंड
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को तैयार करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को सिविल कार्य की जिम्मेदारी दी गई है।

वैटलैंड परियोजना के 12 सदस्यों में शामिल प्रोफेसर बाबू ने बताया कि यह वेटलैंड किलोकरी से बाटला हाउस तक करीब 3 किलोमीटर के क्षेत्र में तैयार किए जा रहे हैं जो करीब 1500 मिलियन पानी को शोधित करने का काम करेंगे। यह पानी करीब 25 नालों से गिरकर यमुना को प्रदूषित करने का काम करता है। इसमें महारानी बाग नाला सबसे बड़ा नाला है जिसमें 250 से 500 मिलियन गंदा पानी रहता है।

कालिंदी कॉलोनी के पास तैयार किए गए पहले वेटलैंड में ऑक्सीजन तालाब को तैयार किया गया है जिसमें फिल्टर वाले करीब 25 विभिन्न किस्म के पौधे लगाए गए हैं जो पानी को शोधित करने का काम करेंगे। प्रो. बाबू ने बताया कि तैयार किए जा रहे  वेटलैंड पानी को शोधित कर अलग से संयंत्र का काम करेंगे जो वर्तमान में चल रहे शोधित संयंत्रों का विकल्प है। वेटलैंड से निकलने वाले पानी की गुणवत्ता यमुना के पानी के बराबर होगी।
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उन्होंने बताया कि बाकी के अन्य वेटलैंड दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में शामिल तैमूर नगर, खिजराबाद, जाकिर नगर और बाटला हाउस जैसे कॉलोनी से निकलने वाले गंदे पानी को उपचारित करेंगे। इसके साथ ही करीब 5 किलोमीटर के दायरे में 1 लाख पौधों को भी लगाया जाएगा। दिसंबर के बाद यहां पर पक्षियों का जमावड़ा भी लगेगा। गौरतलब है कि दक्षिणी बायोडवर्सिटी का काम गत वर्ष मई में शुरू किया गया था। इस परियोजना की लागत करीब 250 करोड़ रुपये थी और इसे 5 वर्षो में पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया
था।

टीम में शामिल अराफत ने कहा कि घास से भरी इस जगह का इस्तेमाल स्थानीय निवासियों द्वारा कूड़ा फेंकने के लिए किया जा रहा था। यमुना के क्षेत्र को बचाने के लिए करीब 5 किलोमीटर तक 7 फीट ऊंची दीवार को भी बनाया जा रहा है।
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