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नवजात बेटी को नसीब तक नहीं हुई मां की ममता

Fri, 28 Feb 2020 05:40 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला

सार

  • हिंसा ने छीना मां का आंचल, नवजात बेटी को नसीब तक नहीं हुई मां की ममता        
  • खजूरी खास में बिहार के किशनगंज जिला निवासी प्रमिला ने दिया बेटी को जन्म
  • परिजनों का आरोप, उपचार के अभाव में लोकनायक अस्पताल में तोड़ा दम 
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नवजात - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैं मां के गर्भ में बहुत खुश थी...होती भी क्यों न...आखिर मैं भी अपनी मां के साथ जिंदगी को महसूस करना चाहती थी। अपनी खुशियों को समेट मैं गर्भ से बाहर तो आ गई, लेकिन बदले में मुझे चीखें, मातम और लड़ाई-झगड़ा ही देखने को मिला। मां...क्या ऐसी ही होती है ये दुनिया? एक छोटे से शब्द हिंसा का वास्तविक अर्थ बड़ा ही घिनौना सा है।

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मां ने मुझे जन्म तो दे दिया, लेकिन वो तड़पते-तड़पते मर गई। मैं खुश थी कि मां के आंचल में स्तनपान के साथ लोरियां भी सुनूंगी। मां मुझे सुलाएगी, खिलाएगी-पिलाएगी और जीवन की सच्चाइयों से रूबरू कराएगी, परंतु वो अपनी बिटिया को दूध भी न पिला सकी। इस हिंसा ने मेरी मां को छीन लिया। 

कैसे लोग हैं ये? क्यों एक-दूसरे को मजहब में बांध मारकाट पर उतारू हैं? क्या इनमें जरा सी भी मानवता नहीं। इन लोगों ने भी तो मेरी तरह अपनी मां के कोख से जन्म लिया है। फिर मेरी मां को हिंसा ने क्यों छीन लिया? मेरे इस धरती पर आते ही इतना कुछ देखना शायद जीवन जीने के सपनों पर भारी है। ये कल्पनीय बातें उस नवजात बेटी की हैं, जिसे धरती पर आए अभी 24 घंटे ही हुए हैं।

गोलियों के बीच हुई प्रसव पीड़ा

खजूरी खास निवासी प्रमिला बेगम को बुधवार शाम प्रसव पीड़िता हुई तो उसका पति नौशाद परेशान हो गया। बाहर चीख-पुकार और मारकाट हो रही थी। इसी बीच उन्होंने पड़ोस में मौजूद दाई मां को बुलाया और प्रसव कराया।

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प्रेमिला ने एक बिटिया को जन्म दिया, लेकिन नाल फंसने के कारण दाई मां के हाथ-पैर फूल गए। आनन-फानन में परिजन पड़ोसियों की मदद लेकर हिंसा के बीच से बाहर तो आ गए, लेकिन जब वे लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो वहां भी उन्हें मदद नहीं मिल सकी और प्रमिला ने दम तोड़ दिया। 

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गुहार लगाता रहा नौशाद, नहीं मिला इलाज

नौशाद बताते हैं कि वे कभी एक तो कभी दूसरी खिड़की और डॉक्टर के पास चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। रात एक बजे जब एक महिला डॉक्टर ने देखा तो उन्होंने प्रमिला को मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद लाचार नौशाद बृहस्पतिवार को अपनी पत्नी का पोस्टमार्टम कराने के बाद बिहार रवाना हो गया। नौशाद बिहार के किशनगंज जिले का मूल निवासी है। अब उसके पास दो बेटे और एक दिन की बिटिया है।

बाद में मिली एंबुलेंस

बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के दौरान जब नौशाद ने अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला दिया तो कई लोगों ने उनकी मदद की और दिल्ली सरकार ने घर जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराई। नौशाद बताते हैं कि जब उनकी पत्नी को प्रसव पीडा हो रही थी उस समय चारों ओर तबाही मची हुई थी।

उनके घर के बाहर ही पेट्रोल बम फेंके जा रहे थे। वे 20 साल से दिल्ली में रेशम धागे बनाने वाले कारखाने में काम कर रहे हैं। अब उनके पास दिल्ली में कुछ नहीं बचा है। ये कहते ही नौशाद अपनी बिटिया को सीने से लगाकर फफक पड़ा।
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