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नौकरशाही पर भड़के विधान सभा अध्यक्ष, बताया ब्रिटिश काल सा रवैया

Mon, 19 Mar 2018 09:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली विधान सभा ने सोमवार को नौकरशाही पर अपनी भड़ास निकाली। प्रश्न काल के दो सवालों के जवाब न मिलने से नाराज विधान सभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने अधिकारियों के रवैए की तुलना ब्रिटिश राज से कर डाली।

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वहीं, पूरे मसले को सदन की विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया। विधायकों की इस मसले पर एक दिन की विशेष चर्चा कराने की मांग पर विधान सभा अध्यक्ष मंगलवार को अपना फैसला सुनाएंगे।

दरअसल, विधायक पंकज पुष्कर व सोमनाथ भारती ने प्रश्न काल में सर्तकता विभाग से जुड़ा सवाल किया था। इसका जवाब देने के लिये खड़े हुये उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि अधिकारियों ने जवाब देने से इंकार कर दिया है। हालांकि, सवाल लिस्ट कर दिये गये थे।
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इसके लिये अधिकारियों ने उपराज्यपाल की मनाही व हाईकोर्ट के फैसले की दलीलें दीं। सिसोदिया के मुताबिक, सवाल का जवाब न देना न सिर्फ इस सदन, बल्कि देश में सारे सदनों व संसद की भी अवमानना का मसला बनता है।

जिन सदनों से अधिकारियों का वेतन पास होता है, वही अधिकारी ईमानदारी से काम नहीं कर रहे हैं। और अगर वह बेइमानी से काम कर रहे हैं या उनके ऊपर कहीं कोई आरोप लगा है तो इसकी जानकारी सदन को नहीं दी जा सकती। 

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ये सदन की अवमानना का मसला है

मनीष सिसोदिया के मुताबिक, हाईकोर्ट के फैसले का इस तरह व्याख्या सरासर गलत है। यह भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है। इसलिए ये सदन की अवमानना का मसला है।

यह कैसे हो सकता है कि जो सूचना दिल्ली के एक आम नागरिक को सूचना के अधिकार तहत मिल जाती है, वही सूचना दिल्ली के चुने हुए प्रतिनिधियों को नहीं दी जा रही है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि वह अधिकारियों के इस तरह के व्यवहार की सूचना भारत सरकार को भी देंगे। जिससे उनके सर्विस रिकार्ड में इसकी जानकारी रखी जा सके। यह सदन की अवमानना का मसला है तो सदन जो तय करेगा वो उचित रहेगा।

इसके बाद विधायक पंकज पुष्कर, सोमनाथ भारती, अखिलेश पति त्रिपाठी, सौरभ भारद्वाज समेत कई विधायकों ने जवाब न मिलने पर नाराजगी जताई। साथ ही इसे सदन की अवमानना बताते हुये एक दिन की विशेष चर्चा कराने की विधान सभा अध्यक्ष से अपील की।

विधान सभा अध्यक्ष ने भी कहा कि अधिकारी उनके अधिकार को चुनौती दे रहे हैं। अधिकारी इतना मजबूर न करें कि कहीं ऐसा न हो कि वह बजट पर दस्तखत करने से इंकार दें। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि अधिकारियों का रवैया ब्रिटिश काल के जैसा है।

यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने इस मसले को विधान सभा की विशेषाधिकारिक समिति को सौंपते हुये एक दिन का विशेष सत्र बुलाने का मंगलवार को फैसला सुनाने की बात कही।
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