केजरीवाल के खिलाफ कुछ ऐसे ही केस देश के अन्य हिस्सों जैसे वाराणसी, पंजाब, अमेठी, असम, महाराष्ट्र, गोवा और अन्य जगहों पर भी दायर हैं। गौरतलब है कि ऐसे मामलों में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद होने की जरूरत पड़ती है।
पार्टी का कहना है कि ऐसे अधिकतर मामले उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा उन्हें हतोत्साहित और कानूनी मामलों में उलझाए रखने के लिए ही किए हैं। पार्टी की कानूनी टीम ने ऐसे सभी मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने की सलाह दी है।
दिल्ली में दायर मामलों को फास्ट ट्रैक पर रखा गया है जिसकी वजह से विधायकों व मंत्रियों को रोजाना या तो दिल्ली या अन्य राज्यों की अदालतों में उपस्थित रहना पड़ता है। पार्टी का कहना है कि एक तो वो ऐसे ही संसाधनों की कमी झेल रहे हैं और ये केस पार्टी के लिए बस एक बोझ की तरह हैं।