मनीष सिसोदिया के मुताबिक, हाईकोर्ट के फैसले का इस तरह व्याख्या सरासर गलत है। यह भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश है। इसलिए ये सदन की अवमानना का मसला है।
यह कैसे हो सकता है कि जो सूचना दिल्ली के एक आम नागरिक को सूचना के अधिकार तहत मिल जाती है, वही सूचना दिल्ली के चुने हुए प्रतिनिधियों को नहीं दी जा रही है।
मनीष सिसोदिया ने कहा कि वह अधिकारियों के इस तरह के व्यवहार की सूचना भारत सरकार को भी देंगे। जिससे उनके सर्विस रिकार्ड में इसकी जानकारी रखी जा सके। यह सदन की अवमानना का मसला है तो सदन जो तय करेगा वो उचित रहेगा।
इसके बाद विधायक पंकज पुष्कर, सोमनाथ भारती, अखिलेश पति त्रिपाठी, सौरभ भारद्वाज समेत कई विधायकों ने जवाब न मिलने पर नाराजगी जताई। साथ ही इसे सदन की अवमानना बताते हुये एक दिन की विशेष चर्चा कराने की विधान सभा अध्यक्ष से अपील की।
विधान सभा अध्यक्ष ने भी कहा कि अधिकारी उनके अधिकार को चुनौती दे रहे हैं। अधिकारी इतना मजबूर न करें कि कहीं ऐसा न हो कि वह बजट पर दस्तखत करने से इंकार दें। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि अधिकारियों का रवैया ब्रिटिश काल के जैसा है।
यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने इस मसले को विधान सभा की विशेषाधिकारिक समिति को सौंपते हुये एक दिन का विशेष सत्र बुलाने का मंगलवार को फैसला सुनाने की बात कही।