सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मॉक टेस्ट में दिल्ली यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं की तैयारियों की कलई खुल गई थी, हिंदी के छात्रों को बी.कॉम का पेपर दिया जा रहा था तो कहीं फर्स्ट इयर के छात्रों को थर्ड ईयर का पेपर पकड़ाया जा रहा था।
मॉक टेस्ट के अंतिम दिन तक यह समस्या दूर नहीं की जा सकी। इस समस्या से न उबर पाने के कारण मंगलवार देर रात यूनिवर्सिटी के शीर्ष पदाधिकारियों की एक बैठक में परीक्षाओं को टालने का फैसला लिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य राजेश झा ने इस फैसले पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था। अगर यूनिवर्सिटी इस मामले का निर्णय प्रक्रिया के अनुसार लेती तो इस गलतफहमी से बचा जा सकता था। अब अगस्त माह में परीक्षा के मोड पर परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा।