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Delhi: सेंट्रल विस्टा के नीचे बिछेगा ट्रैफिक नेटवर्क, सुरंग और अंडरपास से वैकल्पिक यातायात गलियारे की तैयारी

Wed, 17 Jun 2026 06:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा

सार

इंडिया गेट से तीन मूर्ति मार्ग तक फैले इस प्रतिष्ठित क्षेत्र में यातायात दबाव कम करने के लिए सुरंगों, अंडरपास और वैकल्पिक यातायात गलियारों का नेटवर्क विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। 
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लक्ष्य ऐसा समाधान विकसित करना है जो अगले तीन से चार दशकों तक बढ़ते यातायात दबाव को प्रभावी ढंग से संभाल सके। - फोटो : PTI
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विस्तार
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देश की सत्ता, संस्कृति और विरासत का प्रतीक सेंट्रल विस्टा आने वाले वर्षों में बड़े बुनियादी बदलाव का गवाह बन सकता है। इंडिया गेट से तीन मूर्ति मार्ग तक फैले इस प्रतिष्ठित क्षेत्र में यातायात दबाव कम करने के लिए सुरंगों, अंडरपास और वैकल्पिक यातायात गलियारों का नेटवर्क विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। 

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इस दिशा में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने व्यापक ट्रैफिक व्यवहार्यता अध्ययन शुरू किया है, जिसका उद्देश्य राजधानी के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके को भविष्य के जाम संकट से बचाना है। अधिकारियों के अनुसार, अध्ययन केवल मौजूदा यातायात स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वर्ष 2060 तक की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जाएगी।

लक्ष्य ऐसा समाधान विकसित करना है जो अगले तीन से चार दशकों तक बढ़ते यातायात दबाव को प्रभावी ढंग से संभाल सके। योजना की सबसे बड़ी चुनौती आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास और क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है। इसी कारण डीएमआरसी की प्राथमिकता ट्रैफिक को सतह से हटाकर भूमिगत अथवा मल्टी-लेवल व्यवस्था में स्थानांतरित करने पर है।
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अध्ययन के दौरान इंडिया गेट के सी-हेक्सागन, मान सिंह मार्ग, रफी अहमद किदवई मार्ग और तीन मूर्ति मार्ग जैसे प्रमुख और संवेदनशील जंक्शनों पर सुरंगों तथा अंडरपास की संभावनाओं का परीक्षण किया जाएगा। यदि प्रस्तावित योजनाएं लागू होती हैं तो राष्ट्रीय समारोहों, महत्वपूर्ण आयोजनों और वीआईपी मूवमेंट के दौरान भी यातायात संचालन अधिक सुचारू बनाया जा सकेगा। 

सेंट्रल विस्टा को ‘शॉर्टकट’ ट्रैफिक से मिलेगी राहत
अधिकारियों का मानना है कि सेंट्रल विस्टा पर बढ़ते दबाव का एक बड़ा कारण वह यातायात है जिसका गंतव्य यह क्षेत्र नहीं होता, बल्कि जो केवल मार्ग के रूप में इसका उपयोग करता है। इसी थ्रू ट्रैफिक को कम करना अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य है।

योजना के तहत ऐसे वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं जो गुरुग्राम से नोएडा, नोएडा से उत्तर दिल्ली, फरीदाबाद से कुंडली, बहादुरगढ़ से नोएडा अथवा दक्षिण दिल्ली से एयरपोर्ट की ओर यात्रा करते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में एक्सप्रेस-वे, ऑर्बिटल रिंग रोड और अन्य बायपास कॉरिडोर के जरिए इस यातायात को सेंट्रल विस्टा क्षेत्र से बाहर ही डायवर्ट करने के विकल्पों का अध्ययन किया जाएगा। इससे क्षेत्र में स्थानीय और आवश्यक यातायात को बेहतर गति मिल सकती है।

डेटा और तकनीक से तैयार होगी 2060 की तस्वीर
डीएमआरसी इस अध्ययन में आधुनिक माइक्रो-सिमुलेशन मॉडल और बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करेगा। विशेषज्ञ वर्तमान ट्रैफिक पैटर्न के साथ-साथ ‘डू-नथिंग’ परिदृश्य का भी विश्लेषण करेंगे। इसके तहत यह आकलन किया जाएगा कि यदि कोई नया हस्तक्षेप नहीं किया गया तो आने वाले दशकों में यातायात की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।

इसके समानांतर प्रस्तावित सुरंगों, अंडरपास और वैकल्पिक कॉरिडोर के संभावित लाभों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा। छह महीने में पूरी होने वाली इस कंसल्टेंसी रिपोर्ट के आधार पर सेंट्रल विस्टा क्षेत्र के भविष्य के बुनियादी ढांचे की दिशा तय होगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रस्तावित उपाय लागू होते हैं तो राजधानी का यह महत्वपूर्ण इलाका अगले 35 से 40 वर्षों तक बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या से काफी हद तक राहत पा सकता है।

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