यमुना नदी के किनारे पहले से चल रही परियोजनाओं को एकीकृत कर रिवरफ्रंट योजना में समाहित किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से नदी के किनारे पहले से चल रही सभी 11 परियोजनाओं को एकीकृत रिवरफ्रंट में समाहित करने काे कहा है। बताया जा रहा है कि सरकार एक ही योजना के तहत रिवरफ्रंट तैयार करेगी।
इसी योजना में अन्य विकास की गतिविधियां भी शामिल होगी। यह प्रस्तावित रिवरफ्रंट लगभग 22 किलोमीटर लंबा होगा। यह उत्तरी दिल्ली के पल्ला से लेकर दक्षिण में ओखला तक फैला होगा। साथ ही डीडीए के स्वामित्व वाले 1,500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करेगा। इस परियोजना का उद्देश्य यमुना के किनारों को न केवल स्वच्छ और सुंदर बनाना है, बल्कि इसे पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाना भी है।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिमी तट पर प्रमुख परियोजनाओं में कालिंदी अविरल (निजामुद्दीन ब्रिज से डीएनडी फ्लाईवे), कालिंदी बायोडायवर्सिटी पार्क (डीएनडी फ्लाईवे से कालिंदी बाईपास), यमुना वाटिका (पुराना रेलवे ब्रिज से आईटीओ बैराज), वासुदेव घाट (वजीराबाद बैराज से पुराना रेलवे ब्रिज), और इकोटूरिज्म क्षेत्र (गीता कॉलोनी ब्रिज से आईटीओ बैराज) शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, न्यू इंडिया गार्डन और निजामुद्दीन ब्रिज के बीच एक नया रिवरफ्रंट खंड भी प्रस्तावित है। दिल्ली सरकार की हाल ही में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में इस परियोजना को गति देने का निर्णय लिया गया। बीते दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस परियोजना की सराहना करते हुए कहा था कि यह साबरमती रिवरफ्रंट की तरह समयबद्ध तरीके से पूरी होगी।
दिल्ली सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल यमुना को प्रदूषण से मुक्त करेगी, बल्कि दिल्लीवासियों को एक नया मनोरंजन और सांस्कृतिक स्थल भी प्रदान करेगी। साथ ही यमुना की पारिस्थितिकी संतुलन को बहाल करने के लिए जैव-विविधता को बढ़ावा देने, वेटलैंड्स और नदी किनारे बफर जोन बनाने की भी योजना है।
नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का निर्माण जल्द होगा शुरू
दिल्ली सरकार ने हाल ही में 27 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के निर्माण के लिए 3140 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इन प्लांट्स का उद्देश्य नजफगढ़, शाहदरा और सप्लीमेंट्री ड्रेन जैसे प्रमुख प्रदूषण स्रोतों से आने वाले गंदे पानी को ट्रीट करना है। इन नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
साथ ही टर्मिनल सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) और सीवर लाइन बिछाने का काम भी शुरू हो चुका है। यमुना की सतह से कचरा और खरपतवार हटाने के लिए स्किमर, ड्रेज यूटिलिटी क्राफ्ट और खरपतवार हटाने वाली मशीनें तैनात की गई हैं। चुनिंदा घाटों पर इन मशीनों ने सफाई शुरू कर दी है। जानकारों का कहना है कि यमुना की सफाई के रास्ते में कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी समस्या अनटैप्ड ड्रेन और औद्योगिक कचरे का नदी में बहना है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली में यमुना के 33 मॉनिटरिंग पॉइंट्स में से 22 पर पानी की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती।