बिजली पर दिल्ली में खूब राजनीति होती है और सरकार बनती-बिगड़ती भी है, केजरीवाल सरकार को प्रचंड बहुमत मिलने की एक बड़ी वजह बिजली पर जनता से किए वादे भी थे।
इन सब के बावजूद दिल्ली के आम बिजली उपभोक्ता बिजली कीमत तय करने अथवा बिजली व्यवस्था में सुधार पर राय देने से परहेज करते हैं।
एक माह से अधिक समय से आयोग उपभोक्ताओं से सुझाव मांग रहा है लेकिन अभी तक महज 150 ने ही अपने सुझाव भेजे हैं। वित्त वर्ष 2015-16 में बिजली कीमत तय करने के लिए दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग की ओर से मार्च से उपभोक्ताओं से सुझाव मांगे जा रहे हैं।