दुर्घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाली फर्स्ट रेस्पांस व्हीकल (एफआरवी) चालक का काम जख्मी को प्राथमिक उपचार देकर उसकी हालत को स्थिर करना होगा। एंबुलेंस के मौके पर आने तक एफआरवी ही जिम्मेदारी संभालेगा। यह जवाब दिल्ली सरकार ने फरवरी 2019 में आरंभ की गई बाइक एंबुलेंस योजना के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि जिन असिस्टेंट एंबुलेंस ऑफिसर (एएओ) को फर्स्ट रेस्पांस व्हीकल (एफआरवी) चलाने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें इस क्षेत्र में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है।
यह जवाब उस याचिका पर दिया है जिसमें कहा गया है कि सरकार ने इस योजना के लिए प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति नहीं की है, बल्कि पुराने कर्मचारियों के सहारे योजना शुरू की है और यह स्टाफ प्रशिक्षित नहीं हैं।
अधिवक्ता कमलेश कुमार के जरिए याचिका दायर कर याची ने कहा है कि जो लोग एफआरबी योजना में लगाए गए हैं, वह कैट्स के एंबुलेंस चालक व वायरलेस स्टाफ के लोग हैं। इन लोगों को 20 साल पहले ट्रेनिंग दी गई थी। यह लोग किसी मरीज को इंजेक्शन तक नहीं लगा सकते। ज्यादातर एंबुलेंस चालक 50 की उम्र से अधिक के हैं और यह लोग अब बाइक नहीं चला सकते हैं।