जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम के पास टेंट का अस्थायी ढांचा गिरते ही चीख-पुकार मच गई। सभी घायलों को आनन-फानन में अस्पतालों में पहुंचाया गया। हादसे में घायल हुए मरीजों में से 10 की हालत काफी गंभीर बनी हुई है। सभी एम्स के ट्राॅमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल के रेड जोन में भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल इनके बारे में कुछ ज्यादा जानकारी नहीं दी जा सकती। सभी मरीज निगरानी में हैं।
घटना के तुरंत बाद दोनों अस्पतालों के पास कॉल आई। इसके बाद इमरजेंसी लाइन शुरू कर स्वास्थ्यकर्मियों को हाईअलर्ट पर कर दिया गया। साथ ही, अस्पताल प्रशासन ने पुलिस की मदद से हादसा स्थल से अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनवाया। एम्स ट्रामा सेंटर के मुताबिक सुबह 11:52 बजे घटनास्थल से पहला मरीज लाया गया, जबकि दोपहर 12:37 बजे आखिरी मरीज ट्राॅमा सेंटर पहुंचा। मरीजों की स्क्रीनिंग कर उन्हें रेड व यलो जोन में भर्ती किया गया।
जांच के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए सात मरीजों को आपातकालीन विभाग के रेड जोन में भर्ती किया गया है। इन सभी की जांच चल रही है। फिलहाल, इन मरीजों के बारे में ज्यादा स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है, जबकि अन्य 11 मरीजों को सामान्य चोटें आई हैं। यह सभी 11 मरीज आपातकालीन विभाग के यलो एरिया में भर्ती हैं। मरीजों की हालत स्थिर होने के बाद इन्हें छुट्टी दी जा सकती है।
एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती घायल
आशीष, गोपाल, साहिल रमेश, निजाम, शुजॉए, देवदास, संतू, विक्रम, अमर, संतू, अशोक, कनाई, सुजीत, सुईबुला, शिवनाथ, महादेव और एक अज्ञात।
सफदरजंग अस्पताल में घायल
राजेंद्र दास, राजू, मोनू कुमार, राज बाबू, राजीव, फूलचंद, राम प्रवेश, रामजी पासवान, मुकेश, महादेव और गुड्डू कुमार। यहां एक घायल को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
आधे घंटे तक एंबुलेंस के सायरन से सहमे मरीज
एम्स ट्रामा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लगातार आ रहीं एंबुलेंस के सायरन की आवाज से अन्य मरीज व तीमारदार सहम गए। सामान्य दिनों में 10 से 15 मिनट की देरी पर एंबुलेंस आती हैं, जबकि शुक्रवार को एक के बाद एक एंबुलेंस आती रहीं। सफदरजंग अस्पताल के गायनी विभाग में गायत्री ने बताया कि दोपहर में लगातार मरीजों के आने से डर का माहौल हो गया। लोगों के बीच चर्चा होने लगी कि कही कुछ बड़ा तो नहीं हो गया। एम्स ट्रॉमा सेंटर के वेटिंग हॉल में बैठे अशोक ने कहा कि दोपहर की घटना देखकर सभी काफी डर गए।
परिजन पहले घटनास्थल बाद में अस्पताल भागे
हादसे की सूचना मिलते ही मजदूरों के परिजन घटनास्थल पर पहुंच गए, लेकिन तब तक कई मजदूरों को निकालकर एम्स और सफदरजंग अस्पताल भेजा जा चुका था। रोते-बिलखते परिजन पुलिसकर्मियों से अपनों के बारे में पूछते रहे। जब घटनास्थल पर उनका पता नहीं चला तो वह अस्पताल भागे। हादसे में घायल हुए आशीष का परिवार एम्स ट्रामा सेंटर के बाहर खड़ा था। आशीष को जख्मी हालत में लाया गया था। परिजनों का कहना था कि बड़ी मुश्किल से उन्हें आशीष का पता चला है। इसी तरह दूसरे के मजदूरों के परिजन भी वहां खड़े थे।
अन्य 10 मरीजों की हालत बेहतर है, लेकिन घटना के बाद सभी डरे व सहमे हुए हैं। इन सभी मरीजों को आठवीं मंजिल पर डिजास्टर रूम में भर्ती किया गया है। हालत स्थिर होने के बाद छुट्टी दी जा सकती है।
सफदरजंग : 11:45 बजे पहला मरीज आया
सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि सुबह करीब 11:45 बजे अस्पताल में पहला मरीज आया। अस्पताल के आपातकालीन विभाग में कुल 11 मरीज लाए गए। इनमें से महादेव को गंभीर रूप से चोट लगी थी, उन्हें दोपहर बाद ऑपरेशन थियेटर में ले जाना पड़ा। शनिवार तक उनकी स्थिति के बारे कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा।
मदद की गुुहार लगा रहे थे मजदूर
बाल-बाल बचे मजदूर सुनील ने बताया कि वह शुक्रवार रात से टेंट लगा रहा था। सुबह अचानक टेंट गिर गया। उस समय मजदूर अपने-अपने कामों में जुटे थे। हादसा होते ही मजदूरों के चीखने-चिल्लाने की आवाज आने लगी। वह मदद की गुहार लगाने लगे। कई मजदूर लोहे के फ्रेम-पैनल और बांस व बल्लियों के नीचे दब गए थे। हादसे में वह बच गया पर साथी दब गए।