पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर शुरू होने वाला आंदोलन भले ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वापस ले लिया, लेकिन बजटीय भाषण में भी यह मुद्दा छाया रहा। एक घंटे चालीस मिनट के बजटीय भाषण में करीब 20 मिनट तक पूर्ण राज्य नहीं होने के कारण दिल्ली के विकास में आ रही रुकावटों का ठिकरा केंद्र सरकार व उपराज्यपाल पर फोड़ा गया। इसका उल्लेख करीब नौ पैरों में किया गया है।
बजटीय भाषण के मुख्य अंश में करीब नौ पैरा पूर्ण राज्य पर ही फोकस रहा। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बजटीय भाषण में पूर्ण राज्य के मायने और मतलब बताए। बजट खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कहा कि हमारी सबसे बड़ी चुनौती आधी-अधूरी राज्य है। दिल्ली के विकास में केंद्र सरकार और उपराज्यपाल भी चुनौती हैं। पूर्ण राज्य रहता तो इससे भी बेहतर विकास करके हम दिखाते।
केजरीवाल ने कहा कि टैक्स चुकाने में दिल्ली वाले दूसरे नंबर पर है। डेढ़ लाख करोड़ रुपये हम टैक्स के रूप में केंद्र सरकार को देते हैं, लेकिन इसके एवज में हमें महज 534 करोड़ रुपये की मिलते हैं। पूर्ण राज्य दिल्ली बनेगी तो यह शोषण केंद्र सरकार नहीं कर पाएगी। जीएसटी, नोटबंदी के कारण देश की अर्थव्यवस्था गर्क में जा रही है, लेकिन पूर्ण राज्य नहीं होने के बावजूद दिल्ली की अर्थव्यवस्था बूम पर है। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय की अपेक्षा तीन गुना अधिक है।
विकास के लिए टांग बढ़ाएं, अड़ंगा डालने के लिए नहीं : सिसोदिया
सदन में मनीष सिसोदिया ने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री व उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि अपनी टांग का इस्तेमाल आगे बढ़ने में करें, विकास के कार्यों में अड़ंगा डालने में नहीं। डोर स्टेप डिलीवरी योजना में दो साल इसलिए लग गए कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है। केंद्र सरकार के पास इतने काम हैं कि उनकी प्राथमिकता दिल्ली वालों को घर देने की नहीं हो सकती।
डीडीए हमारे पास होता तो हम भू-माफिया से जमीन खाली करा स्कूल, अस्पताल, घर बनाते। दिल्ली के नागरिकों को दोयम दर्जे का बना दिया गया है। सिसोदिया ने सदन में कहा कि जो मैंने बात कही है, वह इसलिए कही ताकि दिल्ली की चुनौतियों को समझा जा सके। इन चुनौतियों के बावजूद हम विकास कर रहे हैं।