सुबह समय से स्कूल-कॉलेज और दफ्तर पहुंचने वालों की परेशानी बढ़ी। बारिश के चलते दिल्ली-एनसीआर में कई सड़कों पर लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। ऐसे में सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। हर बारिश में भर जाने वाले मिंटो ब्रिज का नजारा इस बारिश बदला-बदला सा दिखा। यहां जलभराव की स्थिति नहीं दिखी।
इसके अलावा, सीपी में भीषण जाम लगा रहा। ऐसे में लोगों को चंद मिनट की दूरी के लिए कई घंटे लग गए। यही नहीं, भारी बारिश के चलते कर्तव्यपथ और इंडिया गेट के आस-पास सब सूना दिखा। दूर तक कोई भी व्यक्ति नजर नहीं आया।
दिल्ली में मौसम का बदलाव और तेज बारिश का असर कई उड़ान सेवाओं पर भी पड़ा। इसे देखते हुए इंडिगो, स्पाइसजेट और एयर इंडिया जैसी बड़ी एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए यात्रा सलाह जारी की। दिल्ली के कई इलाकों में बारिश के चलते जलभराव भी देखने को मिला। मंगलवार को तेज बारिश के बीच ऑरेंज अलर्ट'''' जारी किया हुआ है। आईटीओ, धौला कुआं, नारायणा, पटेल नगर, विजय चौक, जंगपुरा, आरके पुरम, लाजपत नगर, तालकटोरा रोड, रफी मार्ग और रोहिणी जैसे इलाकों में भारी बारिश हुई। पंचकुइयां रोड, मोती बाग, आईटीओ, मुखर्जी नगर और पुल प्रह्लादपुर सहित कई जगहों पर जलभराव की शिकायतें आईं।
दिल्ली में 68.1 मिलीमीटर बारिश हुई
मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली में मंगलवार शाम 5:30 बजे तक सफदरजंग मानक वेधशाला में 68.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। रिज में 129.8, लोधी रोड में 72.4, राजघाट में 45.6, मयूर विहार में 42.5, पूसा में 37.5, आया नगर में 23.4, पालम में 4.6 और नजफगढ़ में 1.5 बारिश दर्ज की गई। इस दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से 5.8 डिग्री सेल्सियस कम के साथ 29.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में हवा में नमी का स्तर 98 से 86 फीसदी रहा। वहीं, मौसम विभाग ने बुधवार के लिए भी हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना जताई है। इस दौरान आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। ऐसे में अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 31 और 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।
4 अगस्त तक कमोबेश ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान
राजधानी में एकबार फिर झमाझम बारिश वाला मौसम बन गया है। मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में 4 अगस्त तक कमोबेश ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। कुछ इलाकों में बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती है। मौसम विभाग की मानें तो इस हफ्ते दिल्ली में अधिकतम तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया जा सकता है। इस दौरान कुछ जगहों पर वज्रपात की घटनाएं भी देखी जा सकती हैं।