जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दो दशक बाद अगले साल छात्र संघ चुनाव होंगे। जामिया में चुनाव सहित विभिन्न मांगों को लेकर 12 अक्तूबर से जारी आंदोलन को बृहस्पतिवार रात को छात्रों ने खत्म करने का एलान किया। इस आंदोलन में कई पड़ाव देखने को मिले थे। आंदोलन के बड़ा होने की शुरुआत 17 अक्तूबर से हुई थी। जब छात्रों को गुलिस्तान गालिब लॉन से हटावा दिया गया था। जिसके बाद काफी हंगामा हुआ था। छात्र दुबारा से आंदोलन स्थल पर आकर बैठ गए थे।
प्रशासन और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। लेकिन छात्र प्रशासन की किसी मांग को मानने के लिए तैयार नहीं थे। छात्रों का कहना था कि जब तक चुनाव को लेकर कार्यक्रम जारी नहीं किया जाएगा वह यहां से नहीं उठेंगे। इस बीच छात्रों को समर्थन देने के लिए आने वाले कुछ सांसदों को हिरासत में भी लिया गया। कैम्पस में अवैध तौर पर दाखिल होने पर मुकदमा भी दर्ज किया गया।
आंदोलन को बढ़ता देख कैंपस के बाहर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता(बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी गई। सोमवार को भी प्रशासन ने छात्रों से समझौते के बाद एक आदेश जारी किया था। लेकिन छात्रों ने उसे भी नामंजूर कर दिया था। फिर मंगलवार रात को कैंपस में तोड़फोड़ का मामला सामने आया। अब आखिर में छात्रों की मांगों को मानते हुए छात्र संघ चुनाव की तारीख का ऐलान किया।
जिसके के बाद कैंपस में जीत का जश्न मना। भूख हड़ताल करने वाले छात्रों को कैंपस में कंधे पर बैठाकर घुमाया गया। डफली बजाने और नारों की गूंज से पूरा कैम्पस परिसर गूंज उठा। छात्रों ने भूख हड़ताल खत्म करने का ऐलान किया। इस आंदोलन के दौरान रेहान ने नंगे पैर रहने की बात की थी कि कार्यक्रम जारी होने के बाद ही चप्पल पहनेंगे।
छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर एबिन बासिल ने 18 दिनों तक संघर्ष किया और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखी। आखिरकार छात्रों के संघर्ष के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा और छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग स्वीकार हुई। यह जीत छात्र एकता, दृढ़ संकल्प और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले हर छात्र की जीत है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि 18 दिनों से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद छात्रों ने अपनी मांगों को आगे बढ़ाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने इस आंदोलन का श्रेय संयुक्त छात्र समन्वय और हजारों छात्रों की एकजुटता को दिया। आंदोलन के दौरान संगठन के नेता जीशान अहमद खान और जामिया इकाई के अध्यक्ष फैजान को गिरफ्तार कर तीन दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अब सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने कहा कि जामिया प्रशासन के प्रतिनिधियों और छात्रों के बीच लगातार बैठकों के बाद गतिरोध खत्म हो गया। करीब 20 साल से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन को अहम सफलता मिली है।
पिछले तीन दिनों से इस मामले में लगातार बातचीत चल रही थी। लेकिन सहमति नहीं बन पा रही थी। इसके बाद केरल से सांसद हारिस बीरन ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने छात्रों की मांगों पर कुलपति से चर्चा की। इसके बाद रजिस्ट्रार के साथ छात्रों के बीच सहमति बनने और प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने की घोषणा की गई।
छात्र प्रतिनिधिमंडल में एनएसयूआई के मोहियुद्दीन, भूख हड़ताल कर रहे एबिन बेसिल के प्रतिनिधि के तौर पर; फरहान इसराइल, भूख हड़ताल कर रहे रेहान खान के प्रतिनिधि के तौर पर, आइसा से नेविल थॉमस, एमएसएफ से सहाद और हबीबा शामिल थीं। बता दे कि जामिया में वर्ष 2006 में छात्र संघ को निलंबित कर दिया गया था। जिसके बाद से फिर कभी चुनाव नहीं हुए।