अधिकारियों के मुताबिक, सलीम गढ़ किला के सामने, पीतमपुरा स्थित टीवी टावर के पास, रिंग रोड स्थित मिलेनियम पार्क, जनकपुरी डिस्टि्रक सेंटर व वसंत विहार में प्रस्तावित फूड हब में स्वच्छ और व्यवस्थित फूड स्टॉल, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग, पेयजल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी व्यवस्था भी बनाई जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि योजना तैयार करने से पहले देश और विदेश के कई सफल मॉडलों का अध्ययन किया गया है। विशेष रूप से इंदौर के प्रसिद्ध छप्पन दुकान और सराफा बाजार के मॉडल को ध्यान में रखा गया है, जहां स्ट्रीट फूड को व्यवस्थित स्वरूप देकर पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बनाया गया है। इसके अलावा सिंगापुर, दुबई और अन्य देशों के फूड कोर्ट एवं हॉकर सेंटर मॉडल का भी अध्ययन किया गया है।
पांचों प्रस्तावित स्थानों पर एमसीडी के पास जमीन नहीं
एमसीडी के अनुसार, पांचों प्रस्तावित स्थानों पर एमसीडी के पास जमीन नहीं है। इन स्थानों पर केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों की भूमि है। इस कारण केंद्र सरकार से भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इन स्थानों पर भूमि मिलने और आवश्यक मंजूरियां प्राप्त होने के बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस तरह आने वाले वर्षों में दिल्ली को भी इंदौर और सूरत की तरह विश्वस्तरीय फूड हब मिल सकेंगे, जो राजधानी की नई पहचान बनेंगे।
रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को लाभ
एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा का कहना है कि इस परियोजना से रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को भी बड़ा लाभ होगा। वर्तमान में कई विक्रेता सड़क किनारे अस्थायी ढंग से कारोबार करते हैं और समय-समय पर अतिक्रमण विरोधी अभियानों का सामना करते हैं। फूड हब विकसित होने के बाद ऐसे विक्रेताओं को निर्धारित स्थानों पर व्यवसाय करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आजीविका अधिक स्थिर हो सकेगी।