सीसीटीवी, बिजली-पानी, डीटीसी की खस्ता हालत के अलावा अन्य बुनियादी मुद्दों को लेकर वे सड़क पर आंदोलन करते रहे, ताकि कांग्रेस का खोया वोट बैंक किसी तरह वापस आ जाए। उधर कांग्रेस का लोकसभा सीटों में आप से गठजोड़ की संभावना की खबरों को लेकर उनकी चिंता बढ़ा दी है।
इस मुद्दे पर वे भले ही खंडन करते आ रहे हैं, लेकिन आलाकमान के किसी भी नेता द्वारा कोई टिप्पणी न करने से वे बैकफुट पर हैं। हालत यह है कि संवाददाता सम्मेलन में मुद्दा कोई भी हो, लेकिन कांग्रेस-आप गठजोड़ पर वे सफाई देते रह जाते हैं। कई मौकों पर तो वे बोखला तक गए। वर्तमान में कांग्रेस ने राजधानी में पानी की समस्या को लेकर जल आंदोलन चलाया हुआ है।
शुरू में तो आंदोलन ने तेजी पकड़ी, लेकिन जब से गठजोड़ की खबरें आई है आम लोगों ने जल सत्याग्रह आंदोलन से किनारा करना शुरू कर दिया। आम लोगों में संदेश जा रहा है कि दोनों पार्टियां मिली हुई हैं और आंदोलन से उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं होगा। हालत यह है कि कांग्रेस नेताओं ने भी आंदोलन से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर कांग्रेस के वोट बैंक पर भी पड़ रहा है।