कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि भारतीय कारोबारी सक्षम हैं। हालांकि, चीन की तकनीक अभी भारत से बेहतर है। सरकार यदि तकनीकी हब बना दे तो छोटे उद्यमी भी वहां डिजाइन तैयार कर खिलौना बनाने में सक्षम हो सकते हैं। खिलौने बनाने में प्लास्टिक, मोल्ड, कंप्यूटराइज मशीन आदि की जरूरत होती है। पिछले कुछ दिनों से भारत सरकार के आईटी विभाग से मदद मिल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही तकनीक में भारत, चीन को टक्कर देगा।
टॉय हब होना चाहिए
कंफेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष देवराज बवेजा का कहना है कि देश में टॉय हब होना चाहिए। इसके लिए एक कॉमन लैब होनी चाहिए, ताकि उद्यमी वहां अपने जरूरी काम करा सकें। मोल्डिंग मशीनें महंगी होती हैं। यह चीजें एक साथ हब में ही संभव हैं। इससे निर्माण लागत में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। तब चीन को पछाड़ना कोई बड़ी बात नहीं होगी। उन्होंने बताया कि चीन में उद्यमियों को बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार मिलता है। भारत में भी यह व्यवस्था हो जाए तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय खिलौनों की धूम मचेगी।
कारोबारियों का कहना है कि पिछले 20 दिनों में खिलौने 20 से 25 फीसदी महंगे हुए हैं। चीन से वॉकर, मैजिक कार, ट्राई-साइकिल आदि आने बंद हो गए है। लॉकडाउन खत्म होने के दौरान डिमांड ज्यादा थी फिर भी महंगाई नहीं बढ़ी। वहीं पिछले 20 दिनों में डिमांड कम होने के साथ महंगाई भी बढ़ी है। स्टील के मूल्य में बढ़ोत्तरी भी महंगाई की मुख्य वजह है। बच्चों की साइकिल के दाम भी करीबन 30-35 प्रतिशत बढ़े हैं।
भारत में बनने लगे ये खिलौने
रॉक ऑन रॉकेट, सिटी राइडर, पप्पी राइडर, बेबी बाथ टब, बेबी रॉकिंग चेयर, मोटो पोटी सीट, डक्की वॉकर, स्विंग कार आदि खिलौने अब भारत में ही बनने लगे हैं। पहले यह चीन से आते थे।