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विशेष खबर: चुनौती बनी अवसर, देसी खिलौना बाजार में उछाल, तकनीक के मामले में भी पड़ोसी देश को पछाड़ने की कोशिश

Sat, 26 Dec 2020 08:20 AM IST
Mohit Mudgal नवनीत शरण, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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खिलौना उद्योग - फोटो : फाइल फोटो
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दिल्ली के खिलौना कारोबारी चुनौतियों को अवसर में तब्दील कर रहे हैं। कोविड-19 व सीमा पर तनातनी के बीच चीन से जरूरी सामान की आवक कम होने पर भारतीय उद्यमियों ने इसे देश में ही तैयार करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री के मन की बात में खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने की बात ने उनके उत्साह को बढ़ाया है। निर्माण कार्य शुरू करने के साथ अब उद्यमियों की कोशिश तकनीक के मामले में भी चीन से आने निकलने की है।

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कारोबारियों का दावा है कि लॉकडाउन खत्म के बाद खिलौना बाजार तेजी से बढ़ा है। इस बीच चीन से आवक तेजी से गिरी। उस वक्त चीन से न तो खिलौने आ रहे थे न ही उन्हें बनाने के लिए जरूरी सामान। अचानक से पैदा हुई मांग की भरपाई करने के लिए खिलौना कारोबारियों ने निर्माण क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाया। यहां तक कि चीन से आने वाली बैट्री, रिमोट सहित इलेक्ट्रॉनिक सामान भी स्थानीय स्तर पर बनाने में सफलता हासिल की।

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव बत्रा ने बताया कि मांग पूरी करने के लिए रात-दिन फैक्ट्रियां चलीं और बेहतर उत्पाद भी किया। खास बात यह है कि महंगाई पर भी असर नहीं पड़ा। प्रधानमंत्री के निर्देश पर सभी मंत्रालय का सहयोग भी मिल रहा है। लेकिन बेहतर तकनीक नहीं होने से चीन की तरह खिलौने बनाने में परेशानी आ रही है। सरकार को चीन की तरह ही प्ले एंड प्लग नीति पर काम करना चाहिए। इसके लिए एक हब तैयार करना होगा, जहां खिलौना उद्यमी बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्पाद तैयार कर सकें।

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भारत दे सकता है चीन को टक्कर

कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि भारतीय कारोबारी सक्षम हैं। हालांकि, चीन की तकनीक अभी भारत से बेहतर है। सरकार यदि तकनीकी हब बना दे तो छोटे उद्यमी भी वहां डिजाइन तैयार कर खिलौना बनाने में सक्षम हो सकते हैं। खिलौने बनाने में प्लास्टिक, मोल्ड, कंप्यूटराइज मशीन आदि की जरूरत होती है। पिछले कुछ दिनों से भारत सरकार के आईटी विभाग से मदद मिल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही तकनीक में भारत, चीन को टक्कर देगा।

टॉय हब होना चाहिए
कंफेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष देवराज बवेजा का कहना है कि देश में टॉय हब होना चाहिए। इसके लिए एक कॉमन लैब होनी चाहिए, ताकि उद्यमी वहां अपने जरूरी काम करा सकें। मोल्डिंग मशीनें महंगी होती हैं। यह चीजें एक साथ हब में ही संभव हैं। इससे निर्माण लागत में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। तब चीन को पछाड़ना कोई बड़ी बात नहीं होगी। उन्होंने बताया कि चीन में उद्यमियों को बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार मिलता है। भारत में भी यह व्यवस्था हो जाए तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय खिलौनों की धूम मचेगी।
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पिछले 20 दिनों में बढ़ी महंगाई

कारोबारियों का कहना है कि पिछले 20 दिनों में खिलौने 20 से 25 फीसदी महंगे हुए हैं। चीन से वॉकर, मैजिक कार, ट्राई-साइकिल आदि आने बंद हो गए है। लॉकडाउन खत्म होने के दौरान डिमांड ज्यादा थी फिर भी महंगाई नहीं बढ़ी। वहीं पिछले 20 दिनों में डिमांड कम होने के साथ महंगाई भी बढ़ी है। स्टील के मूल्य में बढ़ोत्तरी भी महंगाई की मुख्य वजह है। बच्चों की साइकिल के दाम भी करीबन 30-35 प्रतिशत बढ़े हैं।

भारत में बनने लगे ये खिलौने
रॉक ऑन रॉकेट, सिटी राइडर, पप्पी राइडर, बेबी बाथ टब, बेबी रॉकिंग चेयर, मोटो पोटी सीट, डक्की वॉकर, स्विंग कार आदि खिलौने अब भारत में ही बनने लगे हैं। पहले यह चीन से आते थे।
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