दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश कर एक फरार मादक पदार्थ तस्कर अश्वनी कुमार उर्फ आशु को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसेक पास से अल्प्राजोलम टैबलेट के कुल 13 कार्टन (कुल 4,68,000 टैबलेट) बरामद किए है। अंतरराष्ट्रीय बाजार इनमें बरामद इन नशीली गोलियां की कीमत दो करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस गिरोह के सदस्य दिल्ली व एनसीआर में नशीली गोलियां की सप्लाई करते थे।
स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त इंगित प्रताप सिंह के अनुसार, स्पेशल सेल ने इंस्पेक्टर मनेंद्र सिंह, सुनील कुमार व नीरज कुमार की टीम ने अक्तूबर 2023 में इस गिरोह के तीन सदस्यों कर्दमपुरी, दिल्ली निवासी मोहम्मद फैजान बेग, किशनगंज, उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद जुबैर रेखा और बाबा खड़ग सिंह मार्ग, नई दिल्ली को गिरफ्तार किया था। इनके पास से बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद की गईं। उनसे पूछताछ में पता चला कि अश्वनी कुमार उर्फ आशु मोहम्मद जुबैर को भारी मात्रा में ड्रग्स सप्लाई करता था। इसके बाद अश्विनी कुमार को पकड़ने के लिए छापेमारी की गई, लेकिन वह फरार हो गया और मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था।
स्पेशल सेल की टीम आरोपी को लगातार तलाश कर रही थी। एसीपी संजय दत्त और सुनील कुमार की टीम को पता लगा कि अश्वनी कुमार उर्फ आशु सेक्टर 24, रोहिणी में है। इंस्पेक्टर सुनील कुमार, हवलदार राजेश राणा, संजय और अमित कुमार ने सेक्टर 24, रोहिणी में घेराबंदी कर आरोपी आशु को पकड़ लिया। इसकी निशानदेही पर संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, समयपुर बादली, दिल्ली में ट्रांसपोर्ट बुकिंग कार्यालय से अल्प्राजोलम 0.5 मिलीग्राम टैबलेट के 13 कार्टन (कुल 4,68,000 टैबलेट) बरामद की गई। इसके अलावा, उसके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
आरोपी अश्वनी कुमार उर्फ आशु (41) का जन्म 1982 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में हुआ था। उनके पिता एक किसान हैं, और उनकी मां एक गृहिणी हैं। उन्होंने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई यूपी के गुलावठी के एक इंटर कॉलेज से की, बीकॉम किया। मेरठ कॉलेज, मेरठ से और फिर पुणे से एमबीए पूरा किया। उनकी शादी 2009 में हुई और उनके तीन बच्चे हैं। शुरुआत में उन्होंने फार्मास्युटिकल कंपनियों के साथ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के रूप में काम किया। हालांकि, कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण वेतन में गिरावट आई और उन्होंने नौकरी छोड़ दी।
इसके बाद उन्होंने राकेश नामक व्यक्ति के साथ साझेदारी में दिल्ली के उद्योग नगर में ईशान मेडिसिन हाउस के नाम से एक मेडिकल स्टोर खोला, लेकिन जुलाई 2023 में ड्रग विभाग द्वारा उसका ड्रग लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। हालांकि, उसने उद्योग नगर में अपने एक कर्मचारी, जिसका नाम सतीश है, के नाम पर लाइसेंस प्राप्त करके दवा का काम जारी रखा। अर्प्राजोलम जैसी प्रतिबंधित दवाओं में आकर्षक मुनाफा होता है। इसलिए उसने इन दवाओं की खरीद और आपूर्ति शुरू कर दी। वह विभिन्न दवा कंपनियों से प्रतिबंधित दवाएं खरीदता था और उन्हें मोहम्मद जुबैर सहित अपने सहयोगियों को आपूर्ति करता था।