जमीन और रोजगार छिने, अब मतदाता सूची से नाम बाहर
35 वर्षीय रेखा ने बताया कि उनका जन्म और विवाह इसी इलाके में हुआ। उनके अनुसार, एनजीटी के आदेश के बाद इलाके से लोगों की जमीन और घर चले गए तथा कई परिवारों का रोजगार भी प्रभावित हुआ। अब एसआईआर की सूची में नाम नहीं होने से परेशानी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को मृत और कुछ को पलायन कर चुका बताया गया है, जबकि वे अब भी यहीं रह रहे हैं।
-37 वर्षीय लालचंद ने बताया कि वर्ष 2002 में उनका घर टूट गया था, लेकिन उनके माता-पिता यहीं रहे। उनका कहना है कि परिवार 2002 से लगातार मतदान करता आया है। उन्होंने कई बार शिकायत की और अब दोबारा एसआईआर के लिए प्रक्रिया पूरी की है।
80 साल की उम्र में भी नाम का इंतजार
80 वर्षीय रामचरण ने बताया कि उन्होंने अपना पहला वोट पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय डाला था। इसके बाद कई चुनावों में मतदान किया। उनके पास वर्ष 2002 के दस्तावेज भी हैं। उनका कहना है कि एसआईआर के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन के लिए विभागीय कर्मचारी इलाके में आए थे। उन्हें उम्मीद है कि सत्यापन के बाद उनका नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाएगा।
-75 वर्षीय दुलारी ने कहा कि उनके परिवार की चौथी पीढ़ी यहां रह रही है। उनके पूर्वज खेती करते थे, लेकिन बाढ़ के खतरे के कारण बाद में खेती बंद हो गई। अब मतदाता सूची से नाम हटने के बाद परिवार अपने राजनीतिक और नागरिक अस्तित्व को लेकर सवाल उठा रहा है।
47 लाख नाम बाहर, 24 दिन में आए सिर्फ एक लाख दावे
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 47.6 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद नाम दोबारा जुड़वाने के लिए अब तक आए आवेदन इस संख्या की तुलना में बेहद कम हैं। 30 अगस्त को ड्राफ्ट जारी होने के बाद 24 दिनों में करीब एक लाख लोगों ने फार्म-6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है। दावा दाखिल करने के लिए अब केवल छह दिन बाकी हैं।
जून की मतदाता सूची में दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे, जबकि एसआईआर ड्राफ्ट में करीब 97.5 लाख नाम रखे गए हैं। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक फार्म-6 और जरूरी दस्तावेजों के साथ दावा कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची चार नवंबर को प्रकाशित होनी है। कम दावों की संख्या एसआईआर प्रक्रिया में सवाल खड़े कर रही है। हालांकि, अंतिम छह दिनों में आवेदन बढ़ सकते हैं। इसलिए अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि ड्राफ्ट से बाहर हुए सभी लोग नाम दोबारा जुड़वाने के इच्छुक नहीं हैं। कुछ लोग प्रक्रिया से अनजान हो सकते हैं या उनके नाम दूसरे कारणों से ड्राफ्ट में शामिल नहीं हुए हों। एसआईआर ड्राफ्ट से पहले ही निर्वाचन कार्यालय को 2,14,534 फार्म-6 मिल चुके थे। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि इनमें से कितने आवेदकों के नाम ड्राफ्ट में शामिल हुए और कितने आवेदन लंबित हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
नाम बाहर होने को लेकर आप और कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए कहा है कि डुप्लीकेट और अपात्र प्रविष्टियां हटाई गई हैं और पात्र मतदाताओं को दावा करने का अवसर दिया गया है।
एसआईआर को लेकर सियासत तेज, सीजेपी भी विरोध में
एसआईआर को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत विपक्षी दल इस मुद्दे पर लगातार सरकार और निर्वाचन आयोग पर हमलावर हैं। कांग्रेस की ओर से एसआईआर के विरोध में प्रदर्शन भी किया जा चुका है। अब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) भी विरोध के मैदान में उतरने की तैयारी में है।
सीजेपी बृहस्पतिवार को अपनी रणनीति का एलान कर सकती है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। यह घोषणा ऐसे समय में होने जा रही है, जब निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर एक रिपोर्ट के बाद सवाल उठाए जा रहे हैं।