अदालत ने छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को दस साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह कठोर समाज बच्ची को इस हादसे की यादों को भूलने नहीं देगी और वह इसे भूलने में कामयाब नहीं हो पाएगी।
रोहिणी जिला अदालत की विशेष न्यायाधीश सीमा मैन ने आरोपी को पॉक्सो तथा नाबालिग के अपहरण संबंधी धाराओं में दोषी ठहराते हुए दस साल कैद व 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि मामले में दोषी किसी आदमखोर की तरह पीड़िता की दुनिया में दाखिल हुआ और झूठे वादे के सहारे उसके विश्वास को तोड़ कर रख दिया। उस बच्ची को तो यौन कृत्य तक का मतलब तक नहीं पता, लेकिन उसे इसका शिकार होना पड़ा।
अभियोजन के मुताबिक मामले में दोषी पीड़ित बच्ची के पड़ोस में रहता था। वह 17 जनवरी 2013 को बच्ची के घर आया और उसकी मां से उसके पिता के बारे में पूछा। बच्ची की मां ने उसे बताया कि बच्ची का पिता घर पर नहीं है तो वह बच्ची की मां को बताए बगैर बच्ची को अपने साथ ले गया। जब काफी देर तक बच्ची नहीं आई तो मां उसकी तलाश में निकली। उसे सामने गली से बच्ची आती दिखाई दी। उसने बच्ची से पूछा तो उसने बताया कि दोषी उसे अपने साथ एक मकान की छत पर ले गया था तो वहां पर उससे वहां दुष्कर्म किया।