देश की राजधानी में करीब 40-60 फीसदी तक स्वास्थ्यकर्मियों की जगह खाली। आईसीयू कोविड सेंटर के लिए नया स्टाफ चुनौती बन गया है। सरकार दो दिन में चार नियुक्तियों के विज्ञापन जारी कर चुकी है। देखने में आ रहा है कि ज्यादा वेतन देकर प्राइवेट अस्पतालों ने स्टाफ ले लिया है। मोहल्ला क्लीनिक तक का स्टाफ इस वक्त मरीजों की देखभाल में लगा है।
मडेसिविर, ऑक्सीजन, अस्पतालों में बेड और अन्य तरह की दवाओं के बाद अब दिल्ली में डॉक्टर, नर्स एवं पैरामेडिकल स्टाफ का टोटा भी पड़ गया है। राजधानी दिल्ली के अस्पताल लंबे समय से स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे थे लेकिन कोरोना महामारी की नई लहर से बढ़े मरीजों के भार ने इस कमी को और भी अधिक नासूर बना दिया है।
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नीति आयोग की हेल्थी स्टेट्स प्रोग्रेसिव इंडिया 2019 रिपोर्ट के अनुसार राजधानी में करीब 40 से 60 फीसदी तक स्वास्थ्य कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। वर्तमान हालात देखें तो अस्पतालों में 5863 आईसीयू और 2057 वेंटिलेटर हैं जिनमें से क्रमशः 60 और छह खाली हैं लेकिन अस्पतालों में पूछने पर पता चलता है कि यह सभी बेड भरे हुए हैं।
दिल्ली सरकार के अनुसार 27 से 29 अप्रैल के बीच नियुक्ति के लिए चार अलग अलग आदेश दिए हैं। इनमें मोहल्ला क्लीनिक के अलावा सेवानिवृत्त चिकित्सीय कर्मचारियों तक से आवेदन मांगे हैं जिन्हें शिफ्ट के आधार पर वेतन दिया जाएगा। करीब दो सप्ताह बाद भी यह नियुक्ति अभी सरकारी प्रक्रिया में है। हाईकोर्ट ने भी स्वास्थ्य सेवाओं का हवाला देते हुए कोविड सेंटर और स्टाफ की नियुक्ति के निर्देश दिए हैं।
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फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (फोर्डा) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज सोलंकी का कहना है कि वे पिछले कई सप्ताह से स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाते आ रहे हैं। दिल्ली में यह कमी सालों से है। हर दिन कहीं 100 तो कहीं 500 बेड के कोविड सेंटर शुरू किए जा रहे हैं।
ऐसे में सवाल यही है कि यहां स्टाफ आएगा कहां से? जीटीबी और लोकनायक अस्पताल सालों से सीमित स्वास्थ्य कर्मचारियों की मार झेल रहे हैं। फोर्डा के ही सर्जन डॉ. सुनील अरोड़ा का कहना है कि राजधानी के सरकारी अस्पताल कई साल से अतिरिक्त बोझ झेल रहे थे लेकिन अब कोरोना की मार ने इनकी स्थिति को विस्फोटक बना दिया है।
दरअसल दिल्ली सरकार ने जीटीबी और लोकनायक अस्पताल के पास ही 500-500 आईसीयू बेड की क्षमता वाले कोविड केयर सेंटर बनाए हैं जिनमें से एक जीटीबी सेंटर मंगलवार से शुरू हो चुका है। इनके अलावा खेलगांव, बुराड़ी निरंकारी, डीआरडीओ, छतरपुर स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल के अलावा होटल, गुरुद्वारे और बारात घर में भी कोविड सेंटर बनाए हैं। करीब पांच हजार से अधिक बिस्तरों की सुविधा यहां है। इनके अलावा सांसद और विधायक भी अपने अपने क्षेत्र में ऑक्सीजन बेड युक्त सेंटर बना रहे हैं।
अब तक चल गया काम, अब हालात गंभीर
अभी तक अलग अलग कोविड सेंटर पर स्वास्थ्य कर्मचारियों को तैनात करने के लिए सरकार ने जिला प्रशासन, अस्पताल, एनजीओ, अन्य चिकित्सीय संगठनों की सहायता लेकर काम चला लिया था लेकिन पिछले कुछ दिन से अब ऑक्सीजन बेड से अधिक आईसीयू और वेंटिलेटर की मांग शुरू हो चुकी है। लोकनायक अस्पताल, जीटीबी, डीडीयू से मिली जानकारी के अनुसार इनके यहां आईसीयू में करीब 50 से ज्यादा मरीज हैं जिन्हें वेंटिलेटर की आवश्यकता है लेकिन अभी कोई बेड खाली नहीं है। डॉक्टरों के ही अनुसार एक आईसीयू या फिर वेंटिलेटर बेड के लिए कम से कम दो डॉक्टर, चार नर्स और छह पैरामेडिकल स्टाफ तीन शिफ्ट (आठ-आठ घंटे) के लिए होना चाहिए।
राजधानी में स्वास्थ्य कर्मचारियों के खाली पद पद 2015-16 2017-18
विशेषज्ञ 40.2 40.8
मेडिकल ऑफिसर 14.2 26.3
नर्स 40.8 46.9
एएनएम 19.7 8.9
सीएमओ 16.7 25 (नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, आंकड़े फीसदी में)
आयुष-डेंटल सब लगे ड्यूटी पर, प्राइवेट ने भी खींचा
सरकारी अस्पतालों में अभी हालात ऐसे हैं कि एलोपैथी के अलावा आयुर्वेद, होमियोपैथी सहित आयुष और डेंटल के डॉक्टर भी कोविड में ड्यूटी दे रहे हैं। इनके अलावा चिकित्सीय छात्र, इंटर्न और रेजीडेंट डॉक्टरों को भी तैनात किया जा चुका है। ऐसे में अस्थायी नौकरी का एक विकल्प बचता है लेकिन उससे पहले प्राइवेट अस्पतालों ने ज्यादा वेतन का ऑफर देने के साथ इन्हें अपने यहां रख लिया है। कई प्राइवेट अस्पतालों के आईसीयू में बीएएमएस और बीएचएमएस के अंतिम वर्ष छात्र ड्यूटी भी दे रहे हैं।
. एक से 12 अप्रैल : संक्रमण के मामले बढ़ते गए।
. 12 से 17 अप्रैल : सभी आईसीयू, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर फुल।
. 18 से 29 अप्रैल : ऑक्सीजन की किल्लत, ऑक्सीजन बेड भी नहीं
. 12 से 30 अप्रैल : रेमडेसिविर, टोसिलिजुमैब, ऑक्सीमीटर, मेड्रोल सहित कई दवाओं की कमी।
. एक से पांच मई : हालात में कोई सुधार नहीं।
. छह से 10 मई : रिकवरी बढ़ी, ऑक्सीजन बेड मिलना शुरू।
. 11 मई : आईसीयू और वेंटिलेटर खाली नहीं।
. 25 अप्रैल से 11 मई : मेडिकल स्टाफ की कमी, नियुक्तियों के ऑर्डर पर ऑर्डर।
जरूरी फैक्ट्स
. तीन लाख स्वास्थ्य कर्मचारी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में तैनात।
. 53 हजार दिल्ली मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत, 40 फीसदी से ज्यादा दूसरे राज्यों में गए।
. 2203 लोगों की आबादी पर एक डॉक्टर।
. एक सरकारी डॉक्टर 11082 मरीजों को देखता है, डब्ल्यूएचओ के मानक से 10 गुना अधिक।
. 61575 नर्स, 4325 एएनएम, 32079 फॉर्मासिस्ट्स ही कार्यरत। (सभी आंकड़े नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 से)