यह महज इत्तफाक है कि चार पाइप सीधे और सात पाइप टेढ़े लगे हैं। परिजनों का दावा है कि ये पाइप महज हवा आने-जाने के लिए लगाए गए हैं। एक परिजन का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ साल से घर में रह-रहकर निर्माण चल रहा है। नारायण देवी के छोटे बेटे ललित भाटिया ने हवा आने के लिए ही पाइप लगवाए हैं। घर में निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने भी परिवार व पड़ोसियों की बात को दोहराया।
दूसरी ओर, घर के मुख्य दरवाजे के ऊपर की ओर लोहे की 11 पत्तियां भी लगी हैं। यह भी महज संयोग है या इसके पीछे भी कुछ तंत्र-मंत्र का चक्कर है। कुछ पड़ोसी इन पाइपों व लोहे की पत्तियों को अंधविश्वास की उसी कड़ी से जोड़कर देख रहे हैं, जिसकी पुलिस व अन्य लोग आशंका जता रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इन पाइपों व पत्तियों का परिवार के सदस्यों की मौत से कोई न कोई संबंध जरूर था। परिवार ने यह पाइप व दरवाजे पर लोहे की पत्तियां एक साल पहले लगवा लिये थे। तो क्या परिवार के सदस्य या मुखिया एक साल से इस अंधविश्वास को पाले हुए थे? ऐसा तो नहीं कि ये लोग एक साल से आत्महत्या करने की योजना बना रहे थे।