दिल्ली को प्रदूषण की राजधानी भी कहा जाता है। यहां रहने के कई खतरे भी हैं। ये खतरे आपकी सेहत से जुड़े हैं। ऐसे ही कुछ खतरों का एक अध्ययन से खुलासा हुआ है। इस अध्ययन के मुताबिक दिल्ली की हवाएं और यहां का प्रदूषण तथा संपूर्ण वातावरण आपकी सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। यह अलग बात है कि आप देश की राजधानी में कब से रह रहे हैं या कब-कब आते-जाते हैं।
अध्ययन के अनुसार, अगर आप बीते 10 साल में दिल्ली आकर बसे हैं तो आपके अंदर क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का खतरा 1.9 फीसदी अधिक है। जिन लोगों ने हाल ही में धुम्रपान की आदत छोड़ी है उनमें भी सीओपीडी का शिकार होने की अधिक आशंका हो सकती है। एक अध्ययन में इन बातों का खुलासा हुआ है।
अध्ययन से यह भी पता चलता है कि दिल्ली की सीमाओं में कदम रखना ही खुद को खतरे में डालने जैसा है। या कहें कि स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका को बढ़ाने वाला तो है ही। इस अध्ययन के अनुसार अगर कोई व्यक्ति हर दिन दस मिनट से अधिक समय के लिए भी यहां आता है या रुकता है तो उसमें सीओपीडी का खतरा 12.2 प्रतिशत अधिक हो जाता है। और अगर यहां रुकने का अंतराल आधे घंटे से ज्यादा है तो सीओपीडी का खतरा 28 प्रतिशत ज्यादा हो सकता है।
दिल्ली के हालात पर यह अध्ययन यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमसी), स्वास्थ्य शोध विभाग, नीरी और दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने मिलकर किया है।