फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहली बार दिल्ली में होगी फेलुदा किट्स से कोरोना जांच, भारतीय वैज्ञानिकों ने की थी खोज

Mon, 21 Dec 2020 12:26 AM IST
नोएडा ब्यूरो परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
विज्ञापन
कोरोना वायरस: जांच... - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कोरोना वायरस को लेकर दुनिया में सबसे सस्ती कागज आधारित जांच तकनीक की खोज के बाद अब इसका इस्तेमाल देश की राजधानी में होगा। भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार इस तकनीक की खोज की थी, जिसके उत्पादन के लिए टाटा कंपनी से करार किया गया। करीब डेढ़ महीने में किटों का उत्पादन करने के बाद अब इनका इस्तेमाल दिल्ली से शुरू होगा।

विज्ञापन


सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने फेलुदा किट को तैयार किया था। इस तकनीक की मदद से आधा घंटे में कोरोना संक्रमण का पता चल सकता है। नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि टाटा कंपनी से करार के बाद किट का उत्पादन शुरू किया गया। हाल ही में अपोलो ने देशभर में फैले अपने अस्पतालों में इन किट्स का इस्तेमाल करने का करार किया है। इसके अलावा दिल्ली में भी किट्स के जरिए कोरोना संक्रमित मरीजों की पहचान होगी। इसके लिए दिल्ली सरकार की प्रक्रिया चल रही है।

एक कागज स्ट्रिप पर आधारित इस परीक्षण में छवि पर आधारित दृश्य परिणाम प्राप्त होता है। इसके लिए मानक प्रयोगशाला उपकरणों की आवश्यकता होती है और छोटे बैच में परीक्षण किया जा सकता है। प्रयोगशाला में तीव्र प्रतिक्रिया समय 45-50 मिनट और आरएनए-एक्सट्रेक्टेड सैंपल से कुल परीक्षण समय केवल 75 मिनट है। सेंसर और एआई तकनीक पर आधारित इस जांच के जरिए डाटा सुरक्षा भी आसान है। महंगी क्यूपीसीआर मशीनों की तुलना में यह काफी सस्ती जांच है।
विज्ञापन


टाटा कंपनी के अनुसार, हर माह 10 लाख किट का उत्पादन किया जा रहा है। इसे टाटाएमडी चेक नाम दिया गया है। क्रिस्पर कैस-9 प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए इस किट की खोज की थी। यह दुनिया का पहला क्रिस्पर कैस-9 पर आधारित नैदानिक उपकरण है, जिसे विश्व स्तर पर लांच किया है। अभी तक भारत में एंटीजन जांच किट और अब ये फेलुदा किट को तैयार किया है। एंटीजन जांच की गुणवत्ता को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी सराहना कर चुका है। जबकि फेलुदा जांच को लेकर दुनिया के कई देश अब तक दिलचस्पी दिखा चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि जांच किट के उपलब्ध होने के बाद मेक-इन-इंडिया अभियान के तहत भारत के लिए यह बड़ी कामयाबी होगी।

फेलुदा जांच में एआई तकनीक का इस्तेमाल
वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि फेलुदा जांच प्रयोगशाला में किया जाने वाला परीक्षण है, जिसमें क्रिस्पर-कैस 9 प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है। मरीजों के सैंपल लेने के बाद आरएनए एक्सट्रैक्शन और एम्पलीफिकेशन आदि की प्रक्रिया पहले की तरह ही होती हैं, लेकिन सरल, कम खर्चीले उपकरण का उपयोग किया जाता है। गौर करने वाली बात है कि एआई पर आधारित स्वचालित पद्धति से परिणामों का पता लगाया जाने के कारण यह तेजी से परिणाम देता है।
विज्ञापन


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें