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मौत से 'आबाद' इस कब्रिस्तान की उम्र होने वाली है पूरी, प्रबंधन की गुहार-अब रहम करो सरकार

Mon, 06 Jul 2020 05:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली

सार

  • पांच बीघा जमीन भरने के बाद अब नौ बीघा भी हुई फुल
  • अब तक 435 शवों को किया जा चुका है सुपुर्द-ए-खाक
  • जमीन की परेशानी के चलते कब्रिस्तान प्रबंधन ने की सरकार से अपील
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आईटीओ स्थित कब्रिस्तान... - फोटो : अमर उजाला
10 एकड़ में फैला दिल्ली का सबसे बड़ा कब्रिस्तान आधे से ज्यादा भर चुका है। कोरोना काल में यहां अब तक 435 शवों को सुपुर्द-ए-खाक किया जा चुका है। महामारी की शुरुआत में पांच बीघा जमीन आरक्षित किए जाने वाले इस कब्रिस्तान में अब तक नौ बीघा जमीन भर चुकी है।वर्षों पुराने इस कब्रिस्तान का एक हिस्सा अब तक पूरा नहीं भर पाया है, जबकि उसका दूसरा हिस्सा कोरोना महामारी से मरने वालों के अंतिम संस्कार से भरा जा चुका है। इसे लेकर कब्रिस्तान प्रबंधन भी चिंता में है। 
 
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आईटीओ स्थित कब्रिस्तान - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली सरकार को लिखे पत्र में प्रबंधन ने अपील की है कि उनके यहां ज्यादा अंतिम संस्कार के लिए शव न भेजे जाएं। फिलहाल यहां न सिर्फ मध्य दिल्ली, बल्कि दक्षिणी दिल्ली के अस्पतालों से भी एंबुलेंस शवों को लेकर आ रही हैं। सफदरजंग, एम्स ट्रॉमा, लोकनायक, बीएलके, मैक्स समेत कई अस्पतालों की एंबुलेंस हर दिन यहां पहुंच रही हैं।
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कब्रिस्तान - फोटो : अमर उजाला
सुपरवाइजर मोहम्मद शमीम बताते हैं कि पहले पांच बीघा जमीन तय की गई थी, लेकिन अब तक 435 शवों का अंतिम संस्कार होने से नौ बीघा जमीन भर चुकी है। चार एकड़ की जमीन मिलेनियम पार्क स्थित कब्रिस्तान में है, परंतु वहां पुलिस अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दे रही है।
 

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कब्रिस्तान - फोटो : अमर उजाला
एक बार स्टाफ वहां गया भी, लेकिन पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए ताला नहीं खोलने दिया। दिल्ली सरकार को प्रबंधन की ओर से पत्र लिखा जा चुका है। अगर जल्द ही अनुमति नहीं मिली तो आने वाले दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

 
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शवों को सुपुर्द-ए-खाक कराने वाले मोहम्मद शमीम (बाएं, टोपी में) - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस को लेकर एक अलग स्थिति कब्रिस्तान में देखने को मिल रही है। यहां सड़क दुर्घटना में मारे जाने वालों को भी कोविड संदिग्ध करार करते हुए अंतिम संस्कार के लिए भेजा जा रहा है। मोहम्मद शमीम बताते हैं कि उनके यहां अब तक चार ऐसे शव आए हैं जिनका कोरोना से कोई लेना-देना नहीं है। अस्पतालों से मृत्यु प्रमाण पत्र में कोरोना संदिग्ध लिखने की वजह से परिवार वाले यहां लेकर आ रहे हैं। इनमें एक यमन निवासी विदेशी नागरिक भी शामिल है, जो अपनी बेटी का उपचार कराने दिल्ली आए थे। उनकी बेटी का इलाज हो गया, परंतु तीन दिन पहले दक्षिणी दिल्ली इलाके में सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई।
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