कोर्ट नंबर 56 में हुई सुनवाई
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18 मिनट तक नहीं हुई कोई हलचल
ठीक चार बजे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह अपनी अदालत में पहुंचे। जैसे ही उन्होंने कार्यवाही शुरू की, अदालत कक्ष में ऐसा सन्नाटा छा गया कि हल्की सी आहट भी साफ सुनाई दे रही थी। दोषियों के चेहरे पर साफ चिंता की लकीरें देखने को मिल रही थी। जैसे जैसे कार्यवाही आगे बढ़ती गई, कोर्ट के हर वर्डिक्ट के साथ दोषियों के माथे पर पसीना साफ बहता दिखाई दे रहा था। कोर्ट रूम में मौजूद हर नजर न्यायाधीश पर टिकी थी। अगले 18 मिनट तक अदालत में कोई हलचल नहीं हुई। आदेश की हर पंक्ति के साथ दोषियों के चेहरों के भाव बदलते रहे। तनाव साफ दिखाई दे रहा था। आखिरकार अदालत ने ताहिर हुसैन समेत सभी पांच दोषियों को अंकित शर्मा की हत्या और दंगों से जुड़े अपराधों में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना दी। (उम्रकैद) शब्द अदालत में गूंजते ही माहौल बदल गया। इतना सुनते ही ताहिर हुसैन की आंखें भर आईं। साथ ही, उनका चेहरा पीला पड़ गया। उनके चेहरे पर अपने किये का पछतावा साफ दिखाई दे रहा था। अन्य दोषी भी सिर झुकाए खड़े रहे। अदालत कक्ष के बाहर जैसे ही फैसला पहुंचा, कई परिजन रो पड़े। कुछ अपनों तक पहुंचने के लिए आगे बढ़े, लेकिन सुरक्षा घेरा अभेद्य रहा और पुलिस ने किसी को भी मिलने नहीं दिया।