एतिहासिक रामलीला मैदान का नाम बदल कर पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने के प्रस्ताव पर राजनीति शुरू हो गई। मुख्यमंत्री ने जहां नाम बदलने के प्रस्ताव पर कटाक्ष किया कि इससे भाजपा को वोट नहीं मिलेंगे बल्कि प्रधानमंत्री का नाम बदल दे तो कुछ उम्मीद है।
वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उनका कहना है कि भगवान राम सभी के आराध्य है और उनके नाम पर ही रामलीला मैदान रहेगा। इतना ही नहीं तिवारी ने मुख्यमंत्री के अलावा प्रस्ताव रखने वाले अपनी ही पार्टी के पार्षदों को आड़े हाथों लिया है।
दरअसल, भाजपा के कुछ पार्षदों ने श्रेय लेने की होड़ में स्थायी समिति की बैठक से पूर्व ही रामलीला मैदान का नाम बदल कर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर करने का प्रस्ताव रख दिया। दिल्ली का रामलीला मैदान कई एतिहासिक मौकों का गवाह रहा है। जनसंघ नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में जम्मू-कश्मीर को लेकर रामलीला मैदान में ही अपना सत्याग्रह किया था।
आपातकाल के दौरान जय प्रकाश नारायण और अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां रैलियां की थी। अन्ना हजारे ने भी लोकपाल की लड़ाई इसी रामलीला मैदान से लड़ी थी। केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी इसी मैदान में ली थी। लगातार प्रतिष्ठानों का नाम बदलने की खबरों के बीच केजरीवाल ने शनिवार को ट्वीट कर कटाक्ष किया कि रामलीला मैदान के नाम बदलकर अटल के नाम पर रखने से वोट नहीं मिलेंगे।
भाजपा को अपने प्रधानमंत्री का नाम बदला चाहिए। तब शायद कुछ वोट मिल जायें। अब उनके अपने नाम पर तो लोग वोट देने से रहे। वहीं, केजरीवाल पर हमला बालते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि झूठ की खेती करने वाले मुख्यमंत्री श्रद्धेय अटल जी पर घटिया ट्वीट किया है। रामलीला मैदान में अन्ना को मौत के मुख तक धकेल कर सत्ता हड़पने वाले कुछ तो शर्म करो।
उधर, मामले के तूल पकड़ने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तविारी ने स्पष्ट कर दिया कि मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम हम सभी के आराध्य है। इस लिए रामलीला मैदान का नाम बदलने का कोई सवाल ही नहीं उठता। कुछ लोग भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे है कि नाम बदला जाएगा। स्पष्ट है कि तिवारी ने अपनी ही पार्टी के श्रेय लेने वाले पार्षदों को कड़ा संदेश दिया है कि पार्टी से बात किए बिना इस प्रकार से निर्णय पर कार्रवाई भी हो सकती है।