ग्रीन पटाखों से प्रदूषण नहीं बढ़ेगा : वीरेंद्र सचदेवा
नई दिल्ली। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बुधवार को आरोप लगाया कि 11 वर्षों में आप सरकार ने दिल्ली में हिंदू समाज के त्योहारों को रोकने व धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया। पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर जहां दीपावली की खुशियों को सीमित किया गया।
वहीं, छठ जैसे महापर्व को नदी किनारे मनाने से रोककर लाखों पूर्वांचलवासियों की आस्था का अपमान किया। भाजपा सरकार परंपराओं का सम्मान करते हुए ग्रीन पटाखों के माध्यम से प्रदूषण नियंत्रण और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रीन पटाखों से न तो दिल्ली में प्रदूषण बढ़ेगा और न ही धार्मिक भावनाएं आहत होंगी। हमारा लक्ष्य है कि दिल्लीवासी इस बार खुशियों से जगमगाती दीपावली को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में मना सकें।
डीपीसीसी ने लाल श्रेणी के उद्योगों की जांच के लिए उठाया कदम
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले लाल श्रेणी के उद्योगों पर नकेल कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। डीपीसीसी ने इन उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों के मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए सरकारी व निजी एजेंसियों से बोलियां मांगी हैं।
चयनित एजेंसियां लाल श्रेणी के उद्योगों का निरीक्षण करेंगी व प्रदूषण नियंत्रण उपायों की पर्याप्तता रिपोर्ट तैयार करेंगी। यह रिपोर्ट सुनिश्चित करेगी कि उद्योगों में अपशिष्ट उपचार संयंत्र, वायु प्रदूषण फिल्टर और अपशिष्ट प्रबंधन प्रक्रियाएं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। डीपीसीसी के एक अधिकारी ने बताया कि ताप विद्युत संयंत्र, सीमेंट कारखाने और चमड़ा उद्योग अत्यधिक प्रदूषणकारी होते हैं। इनके लिए सख्त निगरानी और नियमन जरूरी है।
इस प्रक्रिया में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) या एनएबीएल-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में नमूनों का विश्लेषण शामिल होगा। आवेदन करने वाली एजेंसियों को दिल्ली या एनसीआर में स्थित होना चाहिए। साथ ही, उनके पास कम से कम पांच वर्ष का अनुभव और पांच योग्य वैज्ञानिक या तकनीकी कर्मचारी होने चाहिए। निजी शोध संस्थानों के लिए 10 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार अनिवार्य है।